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शुभ दोपहर जी आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साईं जिले (पूर्व में अनंतपुर) में स्थित **लेपाक्षी मंदिर** (श्री वीरभद्र स्वामी मंदिर) 16वीं शताब्दी की विजयनगर स्थापत्य कला, उत्कृष्ट मूर्तिकला और रहस्यमयी इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है। **पौराणिक पृष्ठभूमि और नामकरण** * **रामायण काल का संदर्भ:** मान्यता है कि जब रावण माता सीता का हरण करके ले जा रहा था, तब पक्षीराज जटायु ने सीता जी को बचाने के लिए रावण से युद्ध किया था। रावण द्वारा पंख काटे जाने पर जटायु इसी स्थान पर घायल होकर गिरे थे। * **'ले पाक्षी' का अर्थ:** सीता जी की खोज में जब भगवान श्री राम यहाँ पहुँचे, तो उन्होंने घायल जटायु को देखकर तेलुगु भाषा में कहा—**"ले, पाक्षी"** (अर्थात *उठो, पक्षी*)। इसी से इस स्थान का नाम 'लेपाक्षी' पड़ा। मंदिर प्रांगण में माता सीता का माना जाने वाला एक विशाल पदचिह्न भी मौजूद है। **ऐतिहासिक निर्माण** * **काल एवं शासक:** मुख्य मंदिर परिसर का निर्माण विजयनगर साम्राज्य के शासक **अच्युत देवराय** (राजा कृष्णदेवराय के उत्तराधिकारी) के शासनकाल के दौरान **1530 से 1540 ईस्वी** के मध्य हुआ था। * **निर्माता:** इसका निर्माण विजयनगर के कोषाध्यक्ष **विरुपन्ना** और उनके भाई **वीरन्ना** ने कछुए के आकार की एक विशाल ग्रेनाइट पहाड़ी (कूर्म शिला) पर करवाया था। * **मुख्य देवता:** यह मंदिर भगवान शिव के उग्र रूप **वीरभद्र** को समर्पित है। परिसर में भगवान विष्णु और भगवान शिव के अन्य स्वरूपों के भी मंदिर हैं। **स्थापत्य कला एवं प्रमुख आकर्षण** * **हैंगिंग पिलर (हवा में झूलता खंभा):** मंदिर के नृत्य मंडप में कुल 70 स्तंभ हैं, जिनमें से एक स्तंभ जमीन को छुए बिना हवा में लटका हुआ है। ब्रिटिश काल में एक इंजीनियर ने इसके संतुलन को समझने के लिए इसे हिलाने का प्रयास किया, जिससे पूरे ढांचे पर असर पड़ने लगा और काम रोकना पड़ा। * **विशाल एकाश्म नंदी (Monolithic Nandi):** मंदिर से लगभग 200 मीटर की दूरी पर ग्रेनाइट के एक ही विशाल पत्थर से तराशी गई नंदी की भव्य प्रतिमा है। यह भारत की सबसे विशाल एकाश्म नंदी प्रतिमाओं में से एक है। * **नागलिंग (Seven-hooded Nagalinga):** मंदिर परिसर में एक विशाल शिवलिंग स्थापित है, जिसके ऊपर सात फनों वाला नाग छत्र बनाकर सुरक्षा की मुद्रा में खड़ा है। इसे भी एक ही ग्रेनाइट चट्टान को तराशकर बनाया गया है। * **कल्याण मंडप:** यह भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के उपलक्ष्य में बनाया गया एक विस्तृत मंडप है। इतिहास के अनुसार, राजा की अनुमति के बिना शाही खजाने के उपयोग के आरोप लगने पर इसका निर्माण अधूरा ही रह गया था। * **भित्ति चित्र (Fresco Paintings):** मंदिर की छतों पर 16वीं शताब्दी की प्राकृतिक रंगों से बनी विस्तृत पेंटिंग्स हैं, जो महाभारत, रामायण और पुराणों की कथाओं को दर्शाती हैं।

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