
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
79 days ago
. कटहल का बाग जगन्नाथपुरी के सिंहद्वार के पास उनके परम भक्त रघुदास रहते थे जो वहाँ के राजा के गुरु भी थे। उनके पास भगवान बाल रूप में आते थे। दोनों में सख्य भाव था जिसे सब जानते थे। एक दिन भगवान जगन्नाथ रघुदास के पास आए और कहा–‘राजा का इतना बड़ा कटहलों का बगीचा है फिर भी मुझे कभी भी कटहल का भोग नहीं लगाते। मुझे तो पका कटहल खाना है। चलो हम आज राजा के बगीचे से कटहल चुराएंगे।’ रघुदास ने कहा–‘मैं राजा से आपकी बात बता दूँगा और कटहल ले आऊँगा। कल आपको कटहल का भोग प्राप्त हो जाएगा।’ तब भगवान उसे कहते हैं–‘तुम तो जानते हो कि यशोदा माता के पास माखन की कमी नहीं थी फिर भी मैं पूरे गोकुल में माखन चुराकर खाता था। चुराकर खाने में अलग ही मजा आता है। चलो आज रात हम कटहल चुरा कर लाते हैं।’ रघुदास उनके साथ रात को छिपते हुए राजा के बगीचे में पहुँच गए। भगवान ने रघुदास ने कहा–‘मैं नीचे रहता हूँ तुम जाओ पेड़ से अच्छा बड़ा कटहल तोड़ना और नीचे गिराना। मैं उसे पकड़ लूँगा।’ रघुदास पेड़ पर चढ़कर कटहल दिखा दिखाकर पूछने लगे–‘यह वाला या यह वाला।’ तो भगवान ने उन्हें एक बड़ा सा कटहल तोड़ने को कहा। रघुदास कटहल तोड़कर जैसे ही नीचे गिराए भगवान वहाँ से अंतर्ध्यान हो गए। कटहल गिरने की आवाज सुनकर राजा के सिपाही आ गए। सारी घटना देखकर उन्होंने राजा को जाकर इसकी सूचना दी। राजा स्वयं आए और अपने गुरु को इस तरह पेड़ में चढ़े देखकर उन्हें आश्चर्य हुआ। गुरु से जब कारण जानना चाहा तो रघुनाथ ने कहा–‘मैं आपको एकांत में बताऊँगा। राजा रघुदास जी की भक्ति के बारे में जानते थे कि भगवान उन्हें हमेशा दर्शन देते हैं। सारी बात सुनकर राजा को विश्वास हो गया और उन्होंने कहा–‘यह कटहलों का बगीचा मैं प्रभु के नाम लिख देता हूँ। आप जब चाहे तब भगवान को भोग लगाइये।’ सुबह जब रघुदास समुद्र किनारे जाते हैं तो वहाँ भगवान आते हैं और उनसे कहते हैं–‘कहो ! कैसी रही।' तब रघुदास ने कहा–‘हम तो ठीक है, रात को आप तो अंतर्ध्यान हो गये। एक कटहल तक नहीं ला पाए। देखिये हम पूरा बगीचा ही आपके नाम कर लाए हैं।’ ऐसे ही भगवान अपने भक्तों के साथ खेल भी खेलते थे और उनको लाभ भी कराते थे। ० ० ० ॥ॐ श्रीजगन्नाथाय् नमः॥ ********************************************

Comments (1)

Rama Devi Sahu
Jun 12, 2026
🙏⭕‼️⭕ Jai Jagannath ⭕‼️⭕🙏
