MyMandirInstall

परमा एकादशी की महिमा अत्यंत निराली है। शास्त्रों के अनुसार, यह एकादशी साक्षात भगवान विष्णु को अति प्रिय है और समस्त पापों का नाश करने वाली मानी जाती है। ### परमा एकादशी और कुबेर देव का संबंध कुबेर देव के संदर्भ में यह पौराणिक कथा बहुत प्रसिद्ध है: * **पूर्व स्थिति:** कुबेर देव, जो कि यक्षों के राजा थे, वे पहले धन के देवता नहीं थे। उन्हें यह पद प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या और साधना की आवश्यकता थी। * **ब्रह्मर्षि का उपदेश:** लोकमान्यता और पुराणों के अनुसार, कुबेर देव ने भगवान शिव और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए 'परमा एकादशी' का व्रत अत्यंत निष्ठा से किया था। * **पद्म निधि की प्राप्ति:** इस व्रत के प्रभाव से वे न केवल तेजस्वी बने, बल्कि उन्हें **'पद्म निधि'** (धन का खजाना) का स्वामी बनाया गया। इसी व्रत के पुण्य प्रताप से उन्हें देवताओं के कोषाध्यक्ष (Treasurer of the Gods) का पद प्राप्त हुआ और वे 'धनपति' कहलाए। ### परमा एकादशी का महत्व परमा एकादशी अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष में आती है। इसे 'परमा' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह परम पद प्रदान करने वाली है: 1. **दरिद्रता का नाश:** जो भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा से व्रत रखते हैं, उनके जीवन से आर्थिक कष्ट और दरिद्रता का नाश होता है। 2. **पापों से मुक्ति:** मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत रखने से अनजाने में किए गए समस्त पाप धुल जाते हैं और साधक को बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है। 3. **विधि:** इस दिन भगवान विष्णु के 'पद्मनाभ' स्वरूप की पूजा की जाती है। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करना और ब्राह्मणों को दान देना इस व्रत में विशेष फलदायी होता है। परमा एकादशी हमें यह सीख देती है कि यदि संकल्प दृढ़ हो और प्रभु के प्रति श्रद्धा सच्ची हो, तो एक सामान्य जीव भी अत्यंत उच्च पद और ऐश्वर्य को प्राप्त कर सकता है।

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!