
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
272 days ago
1.12.2025 *"बच्चे स्कूल जाते हैं, कॉलेज जाते हैं, पढ़ते लिखते हैं। कोई डिग्री प्राप्त कर लेते हैं। फिर धन कमाते हैं। घर मकान बंगला बनाते हैं। कार खरीदते हैं। फिर विवाह करते हैं, और खाते पीते तथा नाच गाना आदि करते हैं।"* यह सब करके वे समझते हैं, कि *"बस, इतना ही जीवन है। इसी में जीवन का अंतिम आनन्द है, या ऊंची सफलता है।"* स्कूल कॉलेज में कुछ संसार की बातें जानकर प्रकृति को जानकर वे समझते हैं, कि *"हमारी पढ़ाई पूरी हो गई और इतना पढ़ लेने से संसार की कुछ जड़ वस्तुओं को जान लेने से हमारे जीवन की सब समस्याएं हल हो जाएंगी।"* यह लोगों की भारी भूल है। केवल इतने से सारी समस्याएं हल नहीं होती। *"अभी तो संसार में दो पदार्थ और भी हैं, आत्मा और ईश्वर। इन दोनों के बारे जानना भी आवश्यक है। स्कूल कॉलेज में आत्मा और ईश्वर के विषय में लगभग कुछ नहीं पढ़ाया सिखाया जाता। कुछ लोग अपने माता-पिता या इधर-उधर के संप्रदायों से आत्मा और ईश्वर के विषय में कुछ थोड़ा बहुत सुन लेते हैं। परन्तु उसमें से भी बहुत सारा गलत ज्ञान होता है। इसलिए लोगों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।" "जब तक ठीक ढंग से आत्मा और ईश्वर के सच्चे स्वरूप को नहीं समझेंगे, तब तक यही स्थिति रहेगी, अर्थात लोग दुखी ही रहेंगे।"* *"प्राचीन काल में लोग वेदों का अध्ययन करते थे। वेदों के अनुसार ही जीवन जीते थे। वेदों के अनुसार ही सब प्रशासन आदि कार्य चलते थे। तब प्रजा अधिक सुखी थी। अब लोगों ने वेदों को पढ़ना छोड़ दिया। इसलिए दुख और समस्याएं बढ़ गई।"* *"अतः दुखों से छूटने तथा सुखमय जीवन जीने के लिए आत्मा और ईश्वर के वास्तविक स्वरूप को जानें।" "आत्मा चेतन अल्पज्ञ अल्पशक्तिमान कर्म करने में स्वतंत्र और फल भोगने में ईश्वर की व्यवस्था के आधीन है। ईश्वर सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान संसार का मालिक राजा सबके कर्मों का अध्यक्ष और पूर्ण न्यायकारी है।" "इनके विषय में अधिक जानने के लिए वेदों तथा ऋषियों के ग्रंथों का अध्ययन करें। आत्मा और ईश्वर के स्वरूप को ठीक-ठीक जानकर उसके अनुसार अपना जीवन आचरण बनाएं। ऐसा करने से आप काम क्रोध लोभ ईर्ष्या द्वेष अभिमान आदि दोषों से, तथा झूठ छल कपट चोरी डकैती लूटमार धोखा अन्याय आदि पाप कर्मों से बच पाएंगे।" "सेवा परोपकार दान दया सभ्यता नम्रता आदि उत्तम गुणों को धारण कर पाएंगे, और तभी आप सब दुखों से छूटकर सुखी जीवन जी पाएंगे, अन्यथा नहीं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

Comments (2)

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Dec 1, 2025
जय श्री कृष्णा जी 🙏

Sanju ❤️HR❤️
Dec 1, 2025
Jai Shri Krishna 🙏
