
SHREE SHARMA
13 hours ago
संकल्प की शक्ति ,,,,,,,,,,,, एक संन्यासी जीवन के रहस्यों को समझने हेतु "आत्मज्ञान " प्राप्त करने के लिए कई दिनों तक तपस्या और कठोर साधना में लगे रहे, पर आत्मज्ञान की प्राप्ति नहीं हुई। . थक-हारकर उन्होंने तपस्या छोड़कर घर लौटने का निश्चय किया। दुख और पराजय की भावना ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया था। वह पराजित एवं उत्साहीन मन के कारण एवं शरीर की थकन के कारण लड़खड़ाते कदमों से वापस आ रहे थे। रास्ते में उन्हें प्यास लगी। पानी पीने के लिए वह एक नदी के किनारे गए। . सामने उन्हें एक अजीब दृश्य दिखाई दिया। वे देखते है की एक नन्ही गिलहरी नदी के जल में अपनी पूंछ भिगोकर पानी बाहर छिड़क रही थी। गिलहरी बिना थके अविचल भाव से इस कार्य को करती जा रही थी। . संन्यासी को उत्सुकता हुई। उन्होंने गिलहरी से पूछा, ‘प्यारी गिलहरी, तुम यह क्या कर रही हो?’ गिलहरी ने विनम्रता से उत्तर दिया, ‘इस नदी ने मेरे बच्चों को बहाकर मार डाला। मैं उसी का बदला ले रही हूं। मैं नदी को सुखाकर ही रहूंगी।’ . संन्यासी ने कहा, ‘तुम्हारी छोटी सी पूंछ में भला कितनी बूंदें आती होंगी। . तुम्हारे इतने छोटे बदन, थोड़े से बल और सीमित साधनों से यह नदी कैसे सूख सकेगी? इतना बड़ा काम असंभव है। तुम इसे कभी खाली नहीं कर सकती।’ . गिलहरी बोली, ‘यह नदी कब खाली होगी, यह मैं नहीं जानती। लेकिन मैं अपने काम में निरंतर लगी रहूंगी। मैं श्रम करने और कठिनाइयों से टकराने के लिए तैयार हूं। फिर मुझे सफलता क्यों नहीं मिलेगी?’ . संन्यासी ने गिलहरी के दृढ निश्चय , असीम संकल्प शक्ति को देखकर सोचने लगे कि जब यह नन्ही गिलहरी अपने थोड़े से साधनों सें इतना बड़ा कार्य करने का स्वप्न देखती है, तब भला मैं उन्नत विचारों वाले मस्तिष्क, अन्तःकरण में देविक शक्ति और सुदृढ़ शरीर के होते हुए अपनी मंजिल को क्यों नहीं पा सकता! . ठीक ही कहा जाता है कि कठिनाइयों से लड़ने के संकल्प से ही मनुष्य में ऊर्जा का संचार होता है और वही ऊर्जा के प्रवाह का संचालन रचनात्मक एवं सकारात्मक तरीके से होता है तो वह सिद्धि / सफलता हासिल करता है। . विघ्न बाधाओं को दूर कर मानव सद्बुद्धि एवं सुविचारों के साथ लक्ष्य की ओर बढ़ता है तो उसमें देवत्व का विकास होता है कार्य सिद्ध होता है ! यही सोचकर वह साधक फिर साधना के लिए लौट पड़े। अन्तःतः वे आत्मज्ञान पाने में सफल हुए ! जय प्रथमपूज्य श्री गणेश माता ऋद्धि सिद्धि सदा सहाय 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 आजु धन्य मैं धन्य अति जद्यपि सब विधि हीं l निज जन जानि राम मोहि संत समागम दीन ll

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