MyMandirInstall

*📜 24 मार्च 📜* *🎀 असम राइफल्स // स्थापना दिवस 🎀* *असम राइफल्स स्थापना दिवस की मुख्य बातें:* * स्थापना: 24 मार्च 1835 को ब्रिटिश राज के दौरान। * स्थापना दिवस: प्रतिवर्ष 24 मार्च। * उपनाम: पूर्वोत्तर के प्रहरी (Sentinels of the North-East)। * मुख्यालय: शिलांग, मेघालय। * भूमिका: यह बल भारत-म्यांमार सीमा की सुरक्षा करता है और पूर्वोत्तर में उग्रवाद विरोधी अभियान चलाता है। * नियंत्रण: इसका परिचालन नियंत्रण रक्षा मंत्रालय के पास है, जबकि प्रशासनिक नियंत्रण गृह मंत्रालय के अधीन है। * नाम में बदलाव: 1883 में 'असम फ्रंटियर पुलिस', 1891 में 'असम मिलिट्री पुलिस' और अंत में 1917 में 'असम राइफल्स' नाम पड़ा। महत्व: स्थापना दिवस पर, असम राइफल्स के जवान उन नायकों को याद करते हैं और सम्मानित करते हैं, जिन्होंने देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। असम राइफल्स की स्थापना 24 मार्च 1835 को हुई थी। यह भारत का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल है, जिसे मूल रूप से 'कछार लेवी' (Cachar Levy) के नाम से स्थापित किया गया था। अंग्रेजों द्वारा चाय बागानों की सुरक्षा के लिए बनाया गया यह बल, अब पूर्वोत्तर भारत की सीमाओं की सुरक्षा और उग्रवाद विरोधी अभियानों में मुख्य भूमिका निभाता है। यह गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के प्रशासनिक और परिचालन नियंत्रण में कार्य करता है। असम राइफल्स का मुख्य आदर्श वाक्य "पूर्वोत्तर के प्रहरी" (Sentinels of the North East) है। इसके अलावा, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की स्वदेशी आबादी के साथ सकारात्मक संबंधों को उजागर करने के लिए "पहाड़ी लोगों के मित्र" (Friends of the Hill People) का भी प्रयोग किया जाता है। असम राइफल्स का मुख्य महानिदेशालय (Headquarters) शिलांग (Shillong), मेघालय में स्थित है। यह पूर्वोत्तर भारत का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल है, जिसका गठन 1835 में किया गया था और इसका महानिदेशालय शिलांग के लैतकोर (Laitkor) इलाके में स्थित है। वर्तमान में असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेरा (Lt Gen Vikas Lakhera) हैं। उन्होंने 1 अगस्त 2024 को 22वें महानिदेशक के रूप में पदभार ग्रहण किया। यह शिलांग स्थित मुख्यालय से कार्य करते हैं। ➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!