
SHREE SHARMA
17 hours ago
राम नाम लेखन की महिमा 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 कलियुग में *राम-नाम लेखन* को साक्षात् तपस्या कहा गया है। भूमिका - राम-नाम लेखन क्या है? जब हाथ से *"श्रीराम", "राम-राम"* बार-बार कॉपी-पुस्तक में लिखा जाता है, तो इसे *लिखित जप* कहते हैं। मानस में तुलसी बाबा ने कहा है - *"कलियुग केवल नाम अधारा"*। बोलकर जपने से जीभ पवित्र होती है, मन से जपने से मन पवित्र होता है, पर लिखकर जपने से *हाथ, आँख, मन, जीभ चारों एक साथ पवित्र* हो जाते हैं। बड़े-बड़े संतों ने कहा है - एक बार लिखा हुआ राम-नाम सौ बार बोले हुए नाम के बराबर है। ॥ राम-नाम लेखन का फल और माहात्म्य ॥ *1. शास्त्र-प्रमाण:* *रामेति वर्णद्वयमेव सत्यं,* *रामेति वर्णद्वयं नित्यं मुक्तिदम्।* स्कन्द पुराण में कहा है - राम के दो अक्षर ही सत्य हैं, यही मुक्ति देने वाले हैं। *2. मानस का प्रमाण:* *"बंदउँ नाम राम रघुबर को।* *हेतु कृसानु भानु हिमकर को॥"* राम-नाम अग्नि, सूर्य और चंद्रमा का भी हेतु है - अर्थात् पाप को जलाता है, अज्ञान को मिटाता है, और मन को शीतल करता है। *3. लेखन के 7 महान फल:* *क) पाप-नाश:* एक करोड़ राम-नाम लेखन से ब्रह्म-हत्या जैसे महापाप भी नष्ट हो जाते हैं। *ख) मनोकामना पूर्ति:* जो 9 दिन में 1 लाख राम-नाम लिखकर हनुमान जी को अर्पित करता है, उसकी सभी बाधाएँ दूर होती हैं। *ग) पितृ-तृप्ति:* लिखा हुआ राम-नाम यदि गंगा में प्रवाहित कर दिया जाये तो 7 पीढ़ियों के पितर तृप्त हो जाते हैं। *घ) मृत्यु-सुधार:* निरन्तर राम-नाम लिखने वाले को अन्तकाल में राम-नाम याद रहता है और उसे मोक्ष मिलता है। *ङ) अक्षय पुण्य:* बोला हुआ नाम हवा में चला जाता है, पर लिखा हुआ नाम वर्षों तक दूसरों को प्रेरणा देता है। इसलिए इसका फल अक्षय होता है। *च) वास्तु-शुद्धि:* जिस घर में राम-नाम की लिखी हुई कॉपियाँ रखी रहती हैं, वहाँ नकारात्मक शक्ति प्रवेश नहीं करती। *छ) हनुमान जी की कृपा:* राम-नाम लेखन से हनुमान जी सबसे जल्दी प्रसन्न होते हैं - क्योंकि हनुमान जी को राम-नाम ही प्राणों से प्यारा है। *विधि:* 1. लाल स्याही से लिखना सर्वोत्तम है। 2. रोज़ कम से कम 108 बार लिखें। 3. कॉपी को जूठे हाथ से न छुएँ, नीचे जमीन पर न रखें। 4. पूर्ण होने पर उसे हनुमान मंदिर या राम मंदिर में समर्पित कर दें, जलाएँ नहीं। एक बार लिखकर देखिये, हाथ अपने आप नाम की ओर खिंचने लगेगा।



