
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
55 days ago
*हर हर महादेव* 🔱 सुभ प्रभात जी शिव के 8 प्रिय पुष्प"* का शास्त्रों में बहुत महत्व है। शिव पुराण और अन्य ग्रंथों के अनुसार भोलेनाथ को ये फूल-पत्ते बहुत प्रिय हैं। हर एक के पीछे भाव और कथा है। विस्तार से समझते हैं: *शिव जी को ये 8 पुष्प क्यों प्रिय हैं?* शिव जी वैरागी हैं, औघड़दानी हैं। उन्हें आडंबर पसंद नहीं। इसलिए उन्हें वही फूल-पत्ते प्रिय हैं जो जंगली हैं, आसानी से मिलते हैं, या जिनका औषधीय महत्व है। --- *1. धतूरा* *भाव*: शिव ने समुद्र मंथन का हलाहल विष पिया था। धतूरा भी विषैला होता है। इसे चढ़ाने का अर्थ है कि हम अपने जीवन का विष, बुराई, नकारात्मकता शिव को सौंप रहे हैं। *नियम*: इसका फल और फूल दोनों चढ़ते हैं। सावन में विशेष महत्व। *2. बिल्व पत्र* *भाव*: बिल्व पत्र शिव पूजा का आधार है। इसके 3 पत्ते त्रिदेव, त्रिनेत्र और तीनों गुणों सत्व, रज, तम के प्रतीक हैं। कहते हैं बेल के पेड़ के नीचे शिव का वास होता है। *नियम*: बिना टूटा हुआ, 3 पत्तों वाला बिल्व पत्र उल्टा करके चढ़ाएं। शिवलिंग पर जलधारा के साथ चढ़ाने से सारे पाप कटते हैं। *3. पारिजात / हरसिंगार* *भाव*: ये स्वर्ग का फूल है। मान्यता है कि समुद्र मंथन से निकला था। इसकी सुगंध से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। रात को खिलकर सुबह जमीन पर गिर जाता है, यानी शिव को चढ़ाने के लिए तोड़ना नहीं पड़ता। *नियम*: केवल जमीन से उठाए हुए फूल ही चढ़ते हैं। *4. जूही* *भाव*: जूही का फूल बहुत कोमल और सुगंधित होता है। इसका सफेद रंग मन की शुद्धता और निर्मलता का प्रतीक है। शिव को मन की सच्चाई पसंद है। *नियम*: ताजे और खिले हुए फूल चढ़ाएं। *5. चमेली* *भाव*: चमेली की तेज सुगंध मन को शांत करती है। शिव ध्यान मुद्रा में रहते हैं। चमेली का फूल ध्यान में एकाग्रता लाने में मदद करता है। *नियम*: भगवान शिव को चमेली का इत्र भी चढ़ाया जाता है। *6. केवड़ा* *नोट: यहाँ सावधानी जरूरी है* शास्त्रों में केवड़ा का फूल शिव जी को चढ़ाना *वर्जित* माना गया है। कथा है कि केवड़े ने ब्रह्मा जी के झूठ में साथ दिया था, इसलिए शिव ने उसे शाप दिया। पर *केवड़े का जल या इत्र* शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है, खासकर सावन में। इस इमेज में शायद केवड़े के पौधे की बात है। *7. कनेर* *भाव*: पीली और सफेद कनेर दोनों शिव को प्रिय हैं। कनेर का फूल विषैला होता है, फिर भी शिव को प्रिय है। इसका अर्थ है कि शिव के लिए अच्छे-बुरे का भेद नहीं। वो सबको अपनाते हैं। *नियम*: लाल कनेर शिव जी को न चढ़ाएं। पीली या सफेद चढ़ाएं। *8. आक / मदार* *भाव*: आक का फूल भी विषैला होता है। इसके दूध को आंखों के लिए हानिकारक माना जाता है। इसे चढ़ाने का मतलब है कि हम अपने अहंकार और कड़वाहट को शिव के चरणों में छोड़ रहे हैं। *नियम*: आक के फूल, पत्ते और फल तीनों चढ़ते हैं। शिवलिंग पर अर्पित करने से शत्रु बाधा दूर होती है। --- *जरूरी नियम: शिव जी को क्या न चढ़ाएं* 1. *केतकी / केवड़ा का फूल*: शापित होने के कारण वर्जित है। 2. *तुलसी*: तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय है। शिव ने तुलसी के पति जालंधर का वध किया था, इसलिए तुलसी शिव को नहीं चढ़ती। 3. *कुमकुम/हल्दी*: शिव वैरागी हैं, श्रृंगार की चीजें नहीं चढ़ती। सिर्फ चंदन चढ़ता है। *पुष्प अर्पण का मंत्र* फूल चढ़ाते समय ये बोलें: _पुष्पं समर्पयामि श्री शिवाय नमः_ *सार* शिव को प्रसन्न करने के लिए महंगे फूलों की जरूरत नहीं। भाव चाहिए। धतूरा, आक, बिल्व जैसे जंगली फूल-पत्ते भी अगर सच्चे मन से चढ़ाए जाएं तो भोलेनाथ खुश हो जाते हैं। इसीलिए उन्हें "आशुतोष" यानी जल्दी प्रसन्न होने वाले कहते हैं। सावन का महीना और सोमवार को इन पुष्पों से पूजा का विशेष फल मिलता है। *ॐ नमः शिवाय* 🙏

Comments (1)

सविता
Jul 6, 2026
om namah shivay 🙏🌹
