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जय शिव शक्ति शुभप्रभात जी सनातन दर्शन में **शिव** और **शक्ति** को एक-दूसरे से अलग नहीं माना गया है। इसे हम कुछ इस तरह समझ सकते हैं: * **शिव (चेतना):** शिव वह 'पुरुष' या शुद्ध चेतना हैं जो स्थिर है। वे आधार हैं, लेकिन शक्ति के बिना वे 'शव' के समान माने जाते हैं क्योंकि उनमें क्रिया नहीं होती। * **शक्ति (ऊर्जा):** शक्ति वह 'प्रकृति' या ऊर्जा है जो गतिशील है। बिना शिव के, शक्ति दिशाहीन है; उसे आधार और नियंत्रण की आवश्यकता होती है। ### सृष्टि का चक्र 1. **अद्वैत का मिलन:** जब शिव और शक्ति का मिलन होता है, तभी **सृष्टि (Creation)** का जन्म होता है। यह ठीक वैसा ही है जैसे बिजली (शक्ति) और बल्ब (शिव) के मिलने से प्रकाश होता है। 2. **अर्धनारीश्वर स्वरूप:** भगवान शिव का अर्धनारीश्वर रूप इसी बात का प्रतीक है कि संसार में पुरुषत्व और स्त्रीत्व, या चेतना और पदार्थ, एक-दूसरे के पूरक हैं। 3. **संतुलन का महत्व:** जहाँ शक्ति का सदुपयोग शिव की मर्यादा और शांति के साथ होता है, वहाँ सुंदर सृष्टि और निर्माण होता है। लेकिन जहाँ शक्ति का संतुलन बिगड़ता है, वहाँ प्रलय की स्थिति आ जाती है। **संक्षेप में कहें तो:** शिव 'संकल्प' हैं, तो शक्ति 'सिद्धि' है। शिव 'शब्द' हैं, तो शक्ति 'अर्थ' है। इन दोनों के बिना जीवन और ब्रह्मांड की कल्पना करना असंभव है।

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Comments (3)

R k jangid 

phulera Jaipur

R k jangid phulera Jaipur

Apr 13, 2026

जय हो शिव शक्ति की 🙏

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Apr 13, 2026

ॐ नमः शिवाय 🙏 शुभ दोपहर जी 🙏

Radhe  🌹

Radhe 🌹

Apr 13, 2026

OM Namah Shivay 🙏🕉️ Good Afternoon Ji 🙏