
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
3 days ago
बिल्कुल सच कहा जी ... 100% सच्ची बात है ये 👇 *क़ामयाबी पर पार्टी मांगने वाले,* *तकलीफ़ में फ़ोन तक नहीं उठाते।* मतलब बहुत गहरा है जी इसका - जब आप कामयाब होते हो, गाड़ी लेते हो, नौकरी लगती है, तो ऐसे लोग भी आ जाते हैं जो कभी हाल तक नहीं पूछते थे, वो भी कहते हैं "पार्टी तो बनती है!" लेकिन जब आप पर बुरा वक्त आता है, पैसे की तंगी, बीमारी, टेंशन... तब वही लोग आपका नंबर देख कर भी फोन काट देते हैं, मैसेज सीन करके छोड़ देते हैं। यही दुनिया का दस्तूर है जी। इसीलिए कहते हैं - भीड़ में मत देखो कौन अपना है, वक्त आने पर पता चलता है कौन अपना है। बुरे वक्त में जो 2-3 लोग साथ खड़े रहें, वही आपके असली अपने हैं जी, बाकी सब पार्टी वाले हैं।

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