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*🌹राम ने रावण पर विजय की कामना से पहले की थी इन देवी अपराजिता की आराधना, इनकी पूजा के बिना नहीं मिलता नवरात्रि का फल🌹* 💐💐💐💐💐💐💐💐💐 *⭕देवी अपराजिता की पूजा का आरंभ सर्वप्रथम देवासुर संग्राम के समय हुआ, जब नव दुर्गाओं ने दानवों का संपूर्ण नाश किया था। इसके पश्चात मां दुर्गा अपनी मूल शक्ति, आदिशक्ति अपराजिता की पूजा करने हिमालय में अंतरध्यान हो गईं। इसके बाद त्रेता युग में ब्रह्मांड को रावण के अत्याचारों से मुक्त करवाने के लिए देवी अपराजिता प्रकट हुईं। उन्होंने राम को विजय का आशीर्वाद दिया और रावण का अंत करने में राम की सहायक हुईं।* राम-रावण के बीच भीषण युद्ध चल रहा था। न रावण पराजित हो रहा था और न ही राम को विजय मिल रही थी। जबकि रावण की ओर से उसके भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाद सहित सभी प्रमुख योद्धा काल के मुख में समा चुके थे। रणभूमि में रावण अकेला अपनी सेना के साथ राम का सामना कर रहा था। इधर युद्ध में राम अपने बाण से रावण का शीश काटते, उधर उसके धड़ पर फिर एक शीश आ जाता। एक-एक करके उन्होंने रावण के दस बार शीश काटे और रावण के धड़ पर हर बार नया शीश आ जाता। अपने दस शीशों के कारण ही रावण का एक नाम *•‘दशानन’* भी है। राम समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर रावण की मृत्यु क्यों नहीं हो रही है। क्यों रावण के शीश कट जाने के बाद भी उसके शरीर पर नया शीश आ जाता है। राम अब निराश होने लगे थे। उन्हें लगा ऐसे तो वे रावण को कभी पराजित नहीं कर पाएंगे, और न ही उसका वध कर पाएंगे। इसी चिंता में युद्ध करते-करते नौवां दिन भी बीत गया। दसवें दिन राम ने रावण पर विजय की कामना से युद्ध पर जाने से पूर्व देवी *•‘अपराजिता’* की आराधना की। राम की आराधना से प्रसन्न होकर देवी ने प्रकट होकर उन्हें विजय का आशीर्वाद दिया। देवी से आशीर्वाद लेकर राम युद्ध भूमि में रावण से युद्ध करने के लिए गए। युद्ध में राम ने रावण का वध किया और देवी अपराजिता का विजय का आशीर्वाद पूर्ण हुआ। वराह पुराण के अनुसार, देवी अपराजिता, देवी वैष्णवी के कठोर तप से उत्पन्न हुई थीं। वैष्णवी, देवी त्रिकला का एक रूप हैं। ये भगवान विष्णु की शक्ति का प्रतीक हैं। इनके शरीर का रंग लाल है। इनसे ही अपराजिता सहित और अन्य कई देवियां प्रकट हुईं। ऐसी मान्यता है कि शारदीय नवरात्रि की दशमी तिथि को देवी अपराजिता की पूजा किए बिना नवरात्रि पूजा का फल नहीं मिलता। दोपहर के बाद और संध्याकाल से पहले अपराजिता पूजन किया जाता है। महर्षि वेदव्यास ने अपराजिता को आदिकाल की श्रेष्ठ फल देनेवाली, देवताओं द्वारा पूजित और त्रिदेव द्वारा नित्य ध्यान में लाई जानेवाली देवी कहा है। *🚩#राम_राम_जी🚩* 🙏🏻🙏🏻🙏🏻 💐💐💐💐💐💐💐💐💐

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