
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
104 days ago
जय भोले नाथ! 🙏 भोले बाबा की कृपा आप पर और आपके पूरे परिवार पर हमेशा बनी रहे। आज सीखने और विचार करने के लिए भोले बाबा के जीवन दर्शन से जुड़ी एक बहुत ही सुंदर और गहरी बात: ### **"विष को कंठ में रखना" (धैर्य और सहनशीलता)** जब समुद्र मंथन से भयंकर विष (हलाहल) निकला, तो पूरी सृष्टि की रक्षा के लिए महादेव ने उसे सहर्ष स्वीकार कर लिया। उन्होंने न तो उसे उगलकर दूसरों पर फेंका और न ही उसे अपने अंदर (पेट में) उतारा ताकि वे खुद आहत न हों। उन्होंने उस विष को अपने **कंठ (गले)** में ही रोक लिया, जिससे वे 'नीलकंठ' कहलाए। **आज की सीख:** हमारे दैनिक जीवन में भी कई बार लोगों की कड़वी बातें, अपमान, गुस्सा या परिस्थितियां 'विष' की तरह सामने आती हैं। * अगर हम उस विष को तुरंत उगल देते हैं (पलटकर कड़वा जवाब देते हैं), तो रिश्ते और माहौल खराब होते हैं। * अगर हम उसे अंदर रख लेते हैं (मन में दबा लेते हैं), तो हम खुद तनाव और घुटने का शिकार हो जाते हैं। **महादेव का संदेश:** जीवन में जब भी कोई नकारात्मकता या कड़वाहट आए, तो उसे अपने विवेक के 'कंठ' पर ही रोक लें। उसे न तो अंदर दिल से लगाकर खुद को दुखी करें, और न ही बाहर निकालकर दूसरों को ठेस पहुँचाएं। शांत रहकर उस ऊर्जा को सकारात्मकता में बदल देना ही असली शिवत्व है। हर हर महादेव! आपका आज का दिन मंगलमय और ऊर्जा से भरपूर हो।
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