
SHREE SHARMA
138 days ago
बहुचरा माता की कहानी केवल भक्ति की नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान, स्त्री शक्ति और सामाजिक समावेश की एक अद्भुत गाथा है। बहुचरा माता दिव्य माँ का एक पूजनीय स्वरूप हैं, जिन्हें विशेष रूप से गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्सों में पूजा जाता है। वे अपनी सुरक्षा, पवित्रता और परिवर्तन की शक्ति के लिए जानी जाती हैं। उन्हें अक्सर मुर्गे की सवारी करते हुए दिखाया जाता है, जो सतर्कता, साहस और इच्छाओं पर नियंत्रण का प्रतीक है। माता को शील और नैतिक अनुशासन की रक्षक माना जाता है। साथ ही, वे किन्नर समुदाय की मुख्य आराध्य देवी हैं, जो सामाजिक मानदंडों से परे स्वीकृति, पहचान और आध्यात्मिक गरिमा का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनके भक्त उनसे न्याय, आंतरिक शक्ति और आत्म-साक्षात्कार का आशीर्वाद मांगते हैं। बहुचरा माता की सबसे प्रचलित कथा चारण समाज की एक साहसी कन्या के रूप में शुरू होती है। 1. सतीत्व और आत्म-बलिदान की गाथा प्राचीन लोक कथाओं के अनुसार, बहुचरा जी और उनकी बहनें एक काफिले के साथ यात्रा कर रही थीं। रास्ते में 'बापिया' नामक एक डाकू ने उन पर हमला कर दिया। चारण परंपरा में 'शरण' आए व्यक्ति या स्वयं की रक्षा के लिए प्राण त्यागना (त्रागा करना) एक पवित्र कृत्य माना जाता था। जब डाकू ने बहुचरा जी का शील भंग करने का प्रयास किया, तो उन्होंने अपनी पवित्रता की रक्षा के लिए स्वयं के अंगों का बलिदान दे दिया और डाकू को श्राप दिया कि वह नपुंसक हो जाए। डाकू ने जब क्षमा मांगी, तो माता ने उसे स्त्री के वस्त्र पहनकर उनकी सेवा करने और प्रायश्चित करने को कहा। यही कारण है कि आज भी किन्नर समुदाय उन्हें अपनी कुलदेवी मानता है। 2. मुर्गे की सवारी का रहस्य एक अन्य प्रसिद्ध लोक कथा के अनुसार, अलाउद्दीन खिलजी की सेना जब गुजरात के मंदिर को नष्ट करने आई, तो उन्होंने वहां घूम रहे मुर्गों को मार कर खा लिया। कहते हैं कि माता के चमत्कार से वे मुर्गे सैनिकों के पेट के अंदर से ही बांग (आवाज) देने लगे, जिससे सेना भयभीत होकर भाग गई। तब से मुर्गा उनका वाहन और शक्ति का प्रतीक बन गया। 3. सोलंकी राजा और पुत्र प्राप्ति गुजरात के सोलंकी राजा निःसंतान थे। उन्होंने बहुचरा माता की घोर तपस्या की, जिसके फलस्वरूप उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। इस कारण आज भी गुजरात में बच्चों के 'बाबरी' (मुंडन संस्कार) के लिए बहुचरा जी का मंदिर सबसे प्रमुख स्थान माना जाता है।

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