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SHREE SHARMA

247 days ago

जब एक तोते की वफ़ादारी के आगे नतमस्तक हो गए देवराज इंद्र! ✨ महाभारत के शांति पर्व में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को वफ़ादारी और कृतज्ञता की एक अद्भुत कथा सुनाई थी। यह कहानी है एक धर्मात्मा तोते और देवराज इंद्र के संवाद की। 📜 कथा सार: एक बार एक शिकारी का जहरीला तीर निशाना चूक कर एक हरे-भरे, विशाल वृक्ष में जा लगा। जहर के प्रभाव से वह पेड़ धीरे-धीरे सूखने लगा। उस पेड़ पर रहने वाले सभी पक्षी, जो कल तक उसके फलों का आनंद लेते थे, उसे मरता देख एक-एक कर छोड़ गए। लेकिन, उस पेड़ के कोटर में रहने वाला एक बूढ़ा, धर्मात्मा तोता वहीं डटा रहा। दाना-पानी के अभाव में वह भी पेड़ के साथ-साथ सूखकर कांटा होता जा रहा था, पर उसने अपना घर नहीं छोड़ा। यह बात देवराज इंद्र तक पहुंची। एक मरते हुए वृक्ष के लिए अपने प्राण त्यागने वाले इस तोते को देखने वे स्वयं धरती पर आए। इंद्र का प्रश्न: इंद्र ने तोते से कहा, "अरे भाई! यह पेड़ अब सूख चुका है। न इस पर पत्ते हैं, न फल। इसके बचने की कोई उम्मीद नहीं है। जंगल में फलों से लदे अनेकों पेड़ हैं, सुंदर सरोवर हैं। तुम वहां क्यों नहीं चले जाते? यहां व्यर्थ प्राण क्यों दे रहे हो?" 🦜 तोते का मर्मस्पर्शी उत्तर: तोते ने जो जवाब दिया, उसने देवराज को भी निरुत्तर कर दिया। वह बोला: "देवराज! मैं इसी पेड़ पर जन्मा, इसी की गोद में पला-ब बढ़ा। इसके मीठे फल खाए और इसने मुझे अनेकों बार दुश्मनों से बचाया। जब इसके अच्छे दिन थे, मैंने इसके साथ सुख भोगे। आज जब इस पर बुरा वक्त आया है, तो मैं अपने स्वार्थ के लिए इसे कैसे त्याग दूं? जिसके साथ सुख भोगे, दुःख में उसका साथ छोड़ देना तो अधर्म है। आप देवता होकर भी मुझे ऐसी स्वार्थी सलाह क्यों दे रहे हैं?" 🌸 वरदान और सीख: तोते की निस्वार्थ भक्ति और त्याग देखकर इंद्र प्रसन्न हो गए। उन्होंने कहा, "मांगो, क्या वर मांगते हो?" तोते ने अपने लिए कुछ नहीं माँगा। उसने कहा, "प्रभु, मेरे इस प्यारे आश्रयदाता वृक्ष को पहले की तरह हरा-भरा कर दीजिए।" इंद्र ने अमृत वर्षा करके उस सूखे पेड़ को पुनर्जीवित कर दिया। पेड़ फिर से लहलहा उठा। जीवन का सार: यह कथा हमें सिखाती है कि सच्चे रिश्ते वही होते हैं जो बुरे वक्त में परखे जाते हैं। जिसने हमारे अच्छे समय में साथ दिया हो, उसका हाथ बुरे समय में कभी नहीं छोड़ना चाहिए। जैसा कि भीष्म ने कहा- "किसी के सुख के साथी बनो न बनो, दुख के साथी जरूर बनो। यही सच्ची धर्मनीति है।" ।। जय श्री राधे कृष्ण ।।

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Comments (6)

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Dec 26, 2025

बहुत ही सुन्दर प्रसंग,कथा 👌👌👌

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Dec 26, 2025

जय माता दी 🙏🌹🙏 लक्ष्मी जी करती रहें सुख समृद्धि की बरसात 🙏 माता जी बस साथ दें, सर पर रख कर हाथ 🙏 सपने सब साकार हों, ऐसी हो करामात 🙏जीवन में होती रहे खुशियों की बरसात 🙏🌹☺️ शुभ मंगलकामनाओं के साथ शुभ रात्रि विश्राम भाई जी 🙏🌹☺️ आने वाला दिन आपके लिए शुभ फलदाई व मंगलमय रहे 🙏🌹☺️

Dr Anurag Prajapati

Dr Anurag Prajapati

Dec 26, 2025

राधे राधे भाई साहब

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Dec 26, 2025

Good 😊 Afternoon Jii 🌹 Bhagwan ki Aasirbad se Aap or Aap ke Pure Parivar ko Hamesha Mangal Rakhe or Swastha Surakshit Rakhe 🙏 Aap ka Har Pal Subha Mangalmay Ho 🙏🌹🌹

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Dec 26, 2025

Bahut bahut hi Sundar Story hai 👌👌 Aati Sundar Sikshya Pradayak Prasanga 👌👌 Dhanyawad ❤️ Jii 🌹