
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
84 days ago
*श्री आदित्याय नंमः..।* *प्राताः वंदन..!*🙏🙇♂️ *ॐ नम: सवित्रे जगदेकचक्षुषे,जगत्प्रसूतिस्थतिनाशहेतवे।* *त्रयीमयाय त्रिगुणात्मधारिणे,विरञ्चिनारायणशंकरात्मने,,।।* *अर्थात:- जो जगत् के एक मात्र नेत्र (प्रकाशक)हैं, संसार की उत्पत्ति, स्थिति और नाश के कारण हैं, उन वेदत्रयी स्वरूप,सत्वादि तीनों गुणों के अनुसार ब्रह्मा,विष्णु और महेश नामक तीन रूप धारण करने वाले सूर्य भगवान् को नमस्कार है..!!* *ॐ श्री सूर्याय नमः.।।* *मंगलमय प्रभात..!*🙏

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