
SHREE SHARMA
116 days ago
।। ब्रह्माकृतं- शिव स्तोत्रम् ।। परमपिता ब्रह्मा ने परमात्मा परंब्रह्म शिव की इस स्तोत्र द्वारा उपासना की थी। इसीलिए इस स्तोत्र को ब्रह्मा कृत माना जाता है। नमस्ते भगवान रुद्र भास्करामित तेजसे। नमो भवाय देवाय रसायाम्बुमयात्मने।। शर्वाय क्षितिरूपाय नंदीसुरभये नमः। ईशाय वसवे सुभ्यं नमः स्पर्शमयात्मने।। पशूनां पतये चैव पावकायातितेजसे। भीमाय व्योम रूपाय शब्द मात्राय ते नमः।। उग्रायोग्रास्वरूपाय यजमानात्मने नमः। महाशिवाय सोमाय नमस्त्वमृत मूर्तये।। भावार्थ- ब्रह्माजी बोले कि हे भगवन् ! हे रुद्र ! आपका तेज अनगिनत सूर्यों के तेज सा है। रसरूप, जलमय विग्रहवाले हे भवदेव ! आपको नमस्कार है। नंदी और सुरभि कामधेनु भी आपके ही प्रतिरूप हैं। पृथ्वी को धारण करनेवाले हे सर्वदेव ! आपको नमस्कार है। हे वायुरुपधारी, वसुरुपधारी आपको नमस्कार है। अग्निरुप तेज व पशुपति रूपवाले हे देव ! आपको नमस्कार है। शब्द तन्मात्रा से युक्त आकाश रूपवाले हे भीमदेव ! आपको नमस्कार है। हे उग्ररूपधारी यजमान सदृश आपको नमस्कार है। सोमरूप अमृतमूर्ति हे महादेव! आपको नमस्कार है। समस्त चराचर प्राणियों एवं सकल विश्व का कल्याण करो प्रभु ! ।। हर हर महादेव * ॐ नमः शिवाय ।।

Comments (2)

सविता
May 6, 2026
om namah shivay 🙏🌹
