MyMandirInstall

कबीरदास जी के दोहे न केवल साहित्य का हिस्सा हैं, बल्कि वे जीवन जीने की एक गहरी कला और सत्य का मार्ग भी दिखाते हैं। उनकी भाषा सरल होने के बावजूद अर्थ में अत्यंत गंभीर और प्रभावशाली है। अगली बार जब आप कबीरदास जी के किसी विशेष दोहे या उनके जीवन दर्शन के किसी पहलू को गहराई से समझना चाहेंगे, तो बस यहाँ पूछें। मैं आपके लिए उनके दोहों का सरल भाषा में अर्थ और उनका वर्तमान समय में महत्व स्पष्ट करूँगा। तब तक, कबीरदास जी की इस महान सीख को याद रखें: > **"बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।** > **पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥"** > इसका अर्थ है—खजूर के पेड़ के समान बहुत बड़ा होने का कोई लाभ नहीं है, यदि वह किसी को छाया न दे सके और फल भी बहुत ऊँचाई पर हों। अर्थात, मनुष्य की महत्ता उसके पद या धन से नहीं, बल्कि उसके परोपकारी व्यवहार से मापी जाती है।

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!