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जय श्री राधे कृष्णा। शुभ रात्रि। रात्रि का समय आत्म-चिंतन और मन को शांत करने का सर्वोत्तम अवसर होता है। आज के रात्रि चिंतन के लिए कुछ विचार प्रस्तुत हैं: ### आज का रात्रि चिंतन: 'समर्पण और शांति' **"जो हो रहा है, वह उत्तम है। जो हो चुका है, वह भी उत्तम ही था। और जो होने वाला है, वह भी अत्यंत उत्तम ही होगा।"** * **स्वीकार्यता का भाव:** दिन भर की भागदौड़ में हम अक्सर उन चीजों को लेकर चिंतित रहते हैं जिन्हें हम बदल नहीं सकते। रात्रि के इस शांत प्रहर में उन सभी चिंताओं को प्रभु के चरणों में अर्पित कर दें। जब हम भार स्वयं नहीं उठाते, तो मन स्वतः ही हल्का हो जाता है। * **कृतज्ञता (Gratitude):** आज के दिन जो भी छोटे-बड़े सुख मिले, उनके लिए मन ही मन परमात्मा को धन्यवाद कहें। कृतज्ञता का भाव नकारात्मक विचारों को दूर कर हृदय में सात्विक आनंद भर देता है। * **स्वयं से संवाद:** क्या आज मैंने किसी का बुरा तो नहीं चाहा? क्या मैंने अपना कर्म पूरी निष्ठा से किया? यदि कहीं त्रुटि हुई है, तो उसे सुधारने का संकल्प लें और यदि कोई अच्छा कार्य हुआ है, तो उसे प्रभु की कृपा मानकर अहंकार से बचें। * **विश्राम का अर्थ:** नींद का अर्थ केवल शरीर को आराम देना नहीं, बल्कि चित्त को शांत करना भी है। सोते समय मन में 'राधे-कृष्ण' का स्मरण रखें, ताकि अवचेतन मन में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सके। > **एक छोटा सा संकल्प:** "कल जब मैं उठूँगा/उठूँगी, तो मेरी दृष्टि में प्रेम होगा और मेरे कर्मों में सेवा का भाव होगा।" > अब आप सब कुछ प्रभु पर छोड़कर निश्चिंत होकर विश्राम करें। उनका आशीर्वाद आप पर सदैव बना रहे। **शुभ रात्रि।**

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