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आज 11 मार्च है, जो धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज के सर्वोच्च बलिदान का स्मृति दिवस है। उनका जीवन साहस, अटूट निष्ठा और स्वाभिमान का एक अद्वितीय उदाहरण है। छत्रपति शिवाजी महाराज के उत्तराधिकारी के रूप में, उन्होंने न केवल स्वराज्य की रक्षा की, बल्कि अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी अपने धर्म और मातृभूमि के प्रति अडिग रहे। 1689 में आज ही के दिन, क्रूर यातनाओं को सहते हुए भी उन्होंने झुकने से इनकार कर दिया और हंसते-हंसते वीरगति को प्राप्त हुए। छत्रपति संभाजी महाराज के शौर्य की कुछ मुख्य बातें: * अपराजित योद्धा: अपने छोटे से शासनकाल में उन्होंने लगभग 120 युद्ध लड़े और एक भी युद्ध नहीं हारा। * अतुलनीय साहस: औरंगजेब की कैद में कई दिनों तक अमानवीय यातनाएं सहने के बावजूद उन्होंने अपनी शर्तों और स्वाभिमान पर समझौता नहीं किया। * विद्वान व्यक्तित्व: वे न केवल एक कुशल सेनापति थे, बल्कि संस्कृत और अन्य भाषाओं के प्रकांड विद्वान भी थे। उन्होंने 'बुधभूषणम्' जैसे ग्रंथों की रचना की थी। श्रद्धांजलि संदेश (अपनों के साथ साझा करने के लिए): > "देश-धर्म पर मिटने वाला, वो शेर शिवा का छावा था। > महापराक्रमी परम प्रतापी, एक ही शंभु राजा था।" > अमर बलिदानी धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।

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