
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
297 days ago
मैं गिरधर के घर जाऊँ। गिरधर म्हाँरो साँचो प्रीतम देखत रूप लुभाऊँ॥ रैण पड़ै तब ही उठ जाऊँ भोर भये उठ आऊँ। रैण दिना वा के संग खेलूँ ज्यूँ त्यूँ ताही रिझाऊँ॥ जो पहिरावै सोई पहिरूँ जो दे सोई खाऊँ। मेरी उण की प्रीत पुराणी उण बिन पल न रहाऊँ॥ जहाँ बैठावें तितही बैठूँ बेचै तो बिक जाऊँ। मीरा के प्रभु गिरधर नागर बार-बार बलि जाऊँ ll.:-💲❤️🙏😇🦚💐🌞🇮🇳 🙌🏻 राधे श्याम 🙌🏻

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