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*अमृत कलश* भगवान #परशुराम के तीन प्रमुख शिष्य थे: भीष्म, द्रोणाचार्य, और कर्ण। इन तीनों ने परशुराम से विभिन्न प्रकार के युद्ध और शस्त्र विद्या का ज्ञान प्राप्त किया था। धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में परशुराम जी के कई शिष्यों का वर्णन मिलता है, लेकिन तीन शिष्य सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं: 1. #भीष्म (देवव्रत) गंगा पुत्र भीष्म, महाभारत के सबसे श्रेष्ठ योद्धाओं में गिने जाते हैं। परशुराम जी ने इन्हें दिव्य अस्त्र-शस्त्र, धनुर्विद्या और युद्धनीति का ज्ञान दिया। भीष्म ने कभी गुरु परशुराम के आदेश का उल्लंघन नहीं किया। महाभारत में अम्बा के विवाद को लेकर गुरु-शिष्य युद्ध भी प्रसिद्ध है, जिसमें दोनों ने दिव्य अस्त्रों का प्रयोग किया था। 2. #द्रोणाचार्य कुरु राजकुमारों (पांडव–कौरव) के गुरू द्रोणाचार्य भी परशुराम के शिष्य माने जाते हैं। परशुराम जी ने अपनी संपूर्ण विद्या—धनुर्विद्या, #दिव्यास्त्र, युद्धकला—द्रोणाचार्य को दान में दी थी। द्रोणाचार्य ही आगे चलकर अर्जुन, अभिमन्यु, दुर्योधन, भीम आदि को प्रशिक्षित करने वाले गुरु बने। 3. #कर्ण (सूर्यपुत्र कर्ण) कर्ण ने ब्राह्मण का वेश धारण कर परशुराम जी से दिव्य अस्त्रों का ज्ञान प्राप्त किया था। वे परशुराम के सबसे प्रिय किंतु सबसे विवादित शिष्य बने। जब गुरु को पता चला कि कर्ण ब्राह्मण नहीं है, तो उन्होंने उन्हें “ज्ञान विस्मृति” का श्राप दिया कि निर्णायक क्षण में वे दिव्यास्त्र का प्रयोग नहीं कर पाएँगे। यह श्राप महाभारत के युद्ध में कर्ण के पतन का कारण बना। परशुराम जी की गुरु परंपरा में ये तीनों क्यों महान माने जाते हैं? ✔ गुरु के प्रति अत्यंत श्रद्धा ✔ युद्धकला में अद्वितीय प्रतिभा ✔ धर्म की रक्षा के लिए समर्पण ✔ दिव्यास्त्रों के धारक ✔ इतिहास में अमर योगदान

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