
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
53 days ago
*संस्कारों के देश में संयुक्त परिवार की महत्ता* भारत संस्कारों का देश है। अच्छे संस्कार हमारे देश के लोगों के रोम- रोम में बसते हैं। 1. अतिथि देवो भवः 2. घर की बहु लक्ष्मी एवं अन्नपूर्णा । 3. सर्वे भवन्तु सुखिनः....... । 4. कण- कण में ईश्वर का वास । 5. घर- घर में राम-लक्ष्मण जैसे भाई, जनक जैसे पिता, यशोदा जैसी माँ से परिपूर्ण संयुक्त परिवार । जो हर सुख- दुख में अपने सभी सदस्यों के साथ कदम से कदम मिलकर चलता है। 6. जन्म से पहले ही माँ द्वारा गीता, पुराण के माध्यम से बच्चों में अध्यात्म के गुणों का समावेश । 7. अपने से बड़ों और गुरुजनों का सम्मान । 8. माता- पिता और गुरु भगवान के समान मानना । 9. अन्य प्राणियों की सेवा, सद्भावना एवं परोपकार के भाव । 10. समय पर भोजन एवं शयन । 11. अहिंसा परमो धर्म और दूसरों की मदद करके बड़ा आदमी बनना । ये गुण संयुक्त परिवार के कारण पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरण होते रहते हैं। लेकिन आजकल के एकल परिवार के आकर्षण के कारण अनेक दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। आर्थिक प्रतिस्पर्धा के कारण पति-पत्नी दोनो बच्चों को घर में अकेला छोड़कर काम पर चले जाते हैं । ऐसे में बच्चों को संस्कारित करने वाला कोई सदस्य बचता ही नहीं है। संस्कारों के देश में विलुप्त होते संस्कार या नई पीढ़ी का संस्कारहीनता वास्तव में बड़ी विडम्बना है। छोटो को संस्कारित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। आइए हम सभी परिवार को संस्कारवान बनाएं ।
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