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*1857 का भारतीय स्वातंत्र्य समर* ब्रिटिश ईसाई सत्ता की विभिन्न कुनीतियों के कारण वर्षों तक अपने भीतर आक्रोश लिए बैठे भारतीयों को क्रांति के लिए एक चिंगारी मिल गई थी। ‘गाय की चर्बी’ लगे कारतूस के विरोध करते हुवे 10 मई 1857 को मेरठ से इसकी शुरुआत हुई। इस संग्राम का विस्तार बंगाल से होते हुए लखनऊ, मेरठ से दिल्ली पहुंचा। इसके बाद राजस्थान से बिहार और मध्यप्रदेश तक स्वतंत्रतासेनियों की बाढ़ सी आ गई, जिसने ब्रिटिश ईसाई सत्ता की जड़ें हिला दी। नाना साहेब, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई, बाबू कुंवर सिंह, मंगल पांडे ने प्रमुख रूप से इस स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों एवं क्रांतिकारी घटनाओं का नेतृत्व किया। स्वाधीनता के इस महान संग्राम को ‘वीर सावरकर’ ने भारतीय स्वतंत्रता का पहला संग्राम कहा था। *मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🇮🇳*

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