
SHREE SHARMA
445 days ago
पाई न केहिं गति पतित पावन राम भजि सुनु सठ मना गनिका अजामिल ब्याध गीध गजादि खल तारे घना आभीर जमन किरात खस स्वपचादि अति अघरूप जे कहि नाम बारक तेपि पावन होहिं राम नमामि ते अरे मूर्ख मन! सुन, पतितों को भी पावन करने वाले श्री राम को भजकर किसने परमगति नहीं पाई? गणिका, अजामिल, व्याध, गीध, गज आदि बहुत से दुष्टों को उन्होंने तार दिया। आभीर, यवन, किरात, खस, श्वपच (चाण्डाल) आदि जो अत्यंत पाप रूप ही हैं, वे भी केवल एक बार जिनका नाम लेकर पवित्र हो जाते हैं, उन श्री रामजी को मैं नमस्कार करता हूँ... जय सियाराम 🙏

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