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SHREE SHARMA

429 days ago

उमा राम गुन गूढ़ पंडित मुनि पावहिं बिरति। पावहिं मोह बिमूढ़ जे हरि बिमुख न धर्म रति॥ शंकर जी कहते हैं कि हे उमा! श्रीराम जी के गुण अत्यन्त दिव्य हैं, इन गुणों को जानकर विद्वान और मुनिजन संसार से वैराग्य धारण करते हैं, लेकिन जो मनुष्य भगवान से विमुख होते हैं और जो मनुष्य धर्म का आचरण नहीं करते हैं, ऎसे मूढ़ अज्ञानीजन इन गुणों को सुनकर मोहग्रस्त हो जाते हैं जय सियाराम 🙏

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