MyMandirInstall

2.2.2026 जब तक आपकी बात आपके मन में रहती है, तब तक उसका प्रभाव दूसरों पर नहीं पड़ता। *"परंतु जब आप अपने मन की बात बोल देते हैं, तो सुनने वालों पर उसका प्रभाव पड़ता है।"* *"यदि आपने प्रमाणों से परीक्षा करके सत्य बोला, तो आपको पुण्य मिलेगा। यदि आपने प्रमाणों से परीक्षा किए बिना ही कुछ भी बोला, तो वह झूठ भी हो सकता है, और उसका आपको दंड भी भोगना पड़ सकता है।"* परन्तु इतना तो प्रायः लोग सोचते ही नहीं, कि *"हम जो बोल रहे हैं वह प्रमाणों से परीक्षित सत्य है या नहीं?" "इसलिए लापरवाही और मूर्खता आदि दोषों के कारण लोग बिना परीक्षा किए ही किसी के विषय में भी कुछ भी बात यूं ही बोलते जाते हैं।" "कृपया सावधान रहें। ऐसा न करें। अन्यथा इसका भारी दंड आपको भविष्य में भोगना पड़ सकता है।"* *"महर्षि गौतम जी ने न्याय दर्शन में सत्य और असत्य का निर्णय करने के लिए प्रत्यक्ष अनुमान उपमान शब्द इतिहास अर्थापत्ति संभव और अभाव, ये आठ प्रमाण बताए हैं।"* इन प्रमाणों से सत्य और असत्य का निर्णय होता है। *"तो कृपया इन प्रमाणों से परीक्षा करके ही कुछ भी बोलें। ठीक-ठीक बोलें। तभी आपका बोलना सार्थक होगा और उसका पुण्य भी मिलेगा। इससे आपका भविष्य सुखमय बनेगा।"* *"इन आठ प्रमाणों को विस्तार से जानने के लिए महर्षि दयानन्द सरस्वती जी के लिखे सत्यार्थ प्रकाश का तीसरा समुल्लास पढ़ें।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!