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जय तनोट माता! 🙏 तनोट माता मंदिर का इतिहास वीरता, आस्था और चमत्कारों से भरा है। यहाँ तनोट माता के इतिहास से जुड़ी मुख्य जानकारी दी गई है: ### **प्राचीन मान्यता और स्थापना** * **हिंगलाज माता का अवतार:** तनोट माता को हिंगलाज माता का ही एक रूप माना जाता है। लोककथाओं के अनुसार, मामड़िया चारण की कोई संतान नहीं थी, जिन्होंने हिंगलाज माता की सात बार पैदल यात्रा की। माता ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया और उनके घर सात पुत्रियों और एक पुत्र ने जन्म लिया। इनमें से एक देवी 'आवड़ माता' थीं, जिन्हें 'तनोट राय' या तनोट माता के रूप में पूजा जाता है। * **स्थापना:** भाटी राजपूत नरेश तणुराव ने **विक्रम संवत 828 (828 ईस्वी)** में तनोट का मंदिर बनवाया और मुख्य मूर्ति की स्थापना की। ### **युद्ध का साक्षी और चमत्कार** तनोट माता मंदिर को 'सैनिकों की देवी' और 'थार की वैष्णो देवी' के रूप में भी जाना जाता है। इसका कारण 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध हैं: * **1965 का युद्ध:** इस युद्ध के दौरान, पाकिस्तानी सेना ने मंदिर के आसपास के क्षेत्र पर लगभग 3,000 बम गिराए थे। स्थानीय मान्यताओं और सैनिकों के अनुभव के अनुसार, माँ के चमत्कार से उनमें से एक भी बम नहीं फटा और मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुँचा। ये बिना फटे बम आज भी मंदिर के संग्रहालय में देखे जा सकते हैं। * **1971 का युद्ध:** लोंगेवाला की प्रसिद्ध लड़ाई के दौरान भी मंदिर क्षेत्र की सुरक्षा और भारतीय सेना की विजय में माँ का आशीर्वाद माना जाता है। इस युद्ध के बाद, भारतीय सेना ने मंदिर परिसर में 'विजय स्तंभ' का निर्माण किया। ### **मंदिर की वर्तमान स्थिति** * **प्रबंधन:** 1965 के युद्ध के बाद से ही इस मंदिर का प्रबंधन और रखरखाव **सीमा सुरक्षा बल (BSF)** द्वारा किया जाता है। * **महत्व:** यह जैसलमेर से लगभग 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। * **सैनिकों की आस्था:** BSF के जवान इसे अपनी कुलदेवी मानते हैं और बॉर्डर पर तैनात हर जवान के लिए यह मंदिर श्रद्धा का सबसे बड़ा केंद्र है।

Comments (1)

R k jangid 

phulera Jaipur

R k jangid phulera Jaipur

May 28, 2026

जय माता दी शुभ संध्या वंदन 🙏