
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
148 days ago
भारतीय संस्कृति और रामायण के प्रसंगों में हनुमान जी को 'आदर्श पुत्र' के रूप में देखा जाता है। उनकी मातृभक्ति और माता अंजनी के प्रति उनका समर्पण अद्वितीय है। हनुमान जी द्वारा अपनी माता का "ऋण" चुकाने (या उनके मान को बढ़ाने) के पीछे कुछ खास पहलू हैं: 1. माता की इच्छा और गौरव हनुमान जी ने अपने पराक्रम और चरित्र से माता अंजनी का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया। जब हनुमान जी ने सूर्य को फल समझकर मुख में रख लिया था या जब उन्होंने समुद्र लांघा, तो यह उनकी माता के संस्कारों और उनके द्वारा दिए गए आत्मबल का ही परिणाम था। 2. अपार शक्ति और संयम कहा जाता है कि माता अंजनी ने कठिन तपस्या के बाद हनुमान जी को पुत्र रूप में प्राप्त किया था। हनुमान जी ने अपनी उस असीमित शक्ति का उपयोग हमेशा धर्म की रक्षा और प्रभु श्री राम की सेवा में किया। एक माँ के लिए इससे बड़ा उपहार क्या होगा कि उसका पुत्र संसार में 'संकटमोचन' के रूप में पूजा जाए। 3. निस्वार्थ सेवा (कर्ज उतारने का भाव) शास्त्रों में माना जाता है कि माता-पिता का ऋण कभी उतारा नहीं जा सकता, लेकिन हनुमान जी ने अपनी सेवा और भक्ति से यह सिद्ध किया कि एक पुत्र यदि अपनी शक्ति का सदुपयोग लोक कल्याण के लिए करे, तो वह अपनी जननी के दूध की लाज रख लेता है। > एक प्रसिद्ध प्रसंग: > जब हनुमान जी लंका से लौटे, तो माता अंजनी ने पूछा कि क्या उन्होंने रावण का वध किया? हनुमान जी ने कहा कि वह तो श्री राम का कार्य था। माता ने मुस्कुरा कर कहा कि यदि तुम चाहते तो अपनी पूंछ से ही पूरी लंका को डुबो सकते थे। हनुमान जी की यह विनम्रता ही उनकी माता की सबसे बड़ी जीत थी। > निश्चित रूप से, हनुमान जी का चरित्र हमें सिखाता है कि शक्ति कितनी भी हो, झुकना हमेशा संस्कारों और माता-पिता के चरणों में ही चाहिए।
Comments (1)

R k jangid phulera Jaipur
Apr 4, 2026
अति सुंदर जय सियाराम जी 🌹🙏
