
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
164 days ago
19.3.2026 *"मूर्ख लोग ईश्वर के अनुशासन का पालन करना नहीं चाहते, दूसरों के साथ न्याय पूर्वक व्यवहार करना नहीं चाहते और सुख प्राप्त करना चाहते हैं।"* यह तो असंभव है। *"किसी भी व्यक्ति में इतनी शक्ति और बुद्धि नहीं है, जो ईश्वर के नियमों का उल्लंघन करके सुखी हो जाए। क्योंकि सुख देना, तो ईश्वर का काम है। ईश्वर सर्वज्ञ है, वह सब कुछ जानता है। पक्षपात रहित है, पूर्ण न्यायकारी है। उसे कोई मूर्ख बना नहीं सकता।"* फिर भी मूर्ख लोग ऐसा सोचते हैं, कि *"हम ईश्वर को मूर्ख बना लेंगे। हम बुरे काम कर करके भी सुखी हो जाएंगे।"* ऐसे लोगों से निवेदन है, कि *"कृपया अपनी मूर्खता को समझें और उसे दूर करें."* इतिहास प्रमाण है कि *"करोड़ों वर्षों से बड़े-बड़े ऋषि मुनि तपस्वी राजा महाराजा लोग ईश्वर के आदेश का पालन करते रहे हैं। तभी ईश्वर ने उन्हें सुख दिया। आज भी जो लोग ईश्वर के आदेश निर्देश संदेश का पालन करते हैं, न्याय पूर्वक दूसरों के साथ उत्तम व्यवहार करते हैं। ईश्वर उन्हें ही सुख देता है, अन्यों को नहीं।"* *"अतः यदि आप भी सुखी होना चाहते हों, तो मूर्खों की नकल न करें। बुद्धिमान ऋषि मुनियों तपस्वियों की नकल करें। उनको अपना आदर्श बनाएं। सदा सबके साथ न्याय पूर्वक उत्तम व्यवहार करें। तभी आप सुखी हो पाएंगे, अन्यथा नहीं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़ गुजरात।"*

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