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॥श्री हनुमते नम:॥ अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं। दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्॥ सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं। रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥ भावार्थ:- अतुल बल के धाम, सोने के पर्वत के समान शरीर वाले, दैत्य रूपी वन के लिए अग्नि रूप, ज्ञानियों में अग्रगण्य, संपूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी, श्री रघुनाथजी के प्रिय भक्त पवनपुत्र श्री हनुमान्‌जी को मैं प्रणाम करता हूँ| 🌷‼️जय श्री हनुमान‼️🌷

Comments (2)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Nov 4, 2025

Shri Ram Bhakt Hanuman Ji ki Jai Ho 🙏 Ram Ram Jii 🙏🌹🌹

Asha Bakshi

Asha Bakshi

Nov 4, 2025

JAI BAJRANGBALI 🌹