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प्रेमानंद महाराज जी के ये विचार हृदय को कितनी गहराई से छू जाते हैं। यह केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक बहुत ऊँची अवस्था है। जब कोई हमारे साथ 'दगा' या छल करता है, तो आमतौर पर प्रतिक्रिया क्रोध, दुःख या बदले की भावना होती है। लेकिन महाराज जी यहाँ एक बहुत ही गहरा **आध्यात्मिक दृष्टिकोण** दे रहे हैं: ## १. सच्चाई का प्रकटीकरण महाराज जी का कहना है कि अगर कोई दगाबाज़ी कर रहा है, तो वास्तव में वह आप पर कृपा कर रहा है। उसने अपना असली चेहरा आपके सामने रख दिया है। अब आप भ्रम में नहीं रहेंगे। वह जैसा 'अंदर' था, वैसा ही 'बाहर' आ गया। ## २. मोह का टूटना अक्सर हम रिश्तों में मोह (Attachment) के कारण सत्य को नहीं देख पाते। जब कोई छल करता है, तो वह मोह का धागा टूट जाता है। यह दुखद लग सकता है, लेकिन आध्यात्मिक मार्ग पर यह **मुक्ति** की ओर एक कदम है। ## ३. 'राधे-राधे' का भाव 'राधे-राधे' कहकर खुश होने का अर्थ यह है कि: * "हे प्रभु, आपकी कृपा है कि आपने मुझे इस व्यक्ति के असली स्वरूप से परिचित करा दिया।" * यह स्वीकार करना कि जो हुआ वह ईश्वर की मर्जी से हुआ ताकि मैं और अधिक सतर्क और अपने मार्ग के प्रति दृढ़ हो सकूँ। > **सार:** क्षमा करना और सहज रहना ही सबसे बड़ी शक्ति है। जो छल कर रहा है, वह अपना स्वभाव दिखा रहा है; हमें अपना स्वभाव (शांति और भक्ति) नहीं छोड़ना चाहिए। > ऐसे विचार ही व्यक्ति को मानसिक तनाव से मुक्त कर परम शांति की ओर ले जाते हैं। जय श्री राधे! 🙏

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Comments (1)

Riya Riya  💖💖

Riya Riya 💖💖

May 7, 2026

🌹🌹राधे राधे जी 🌹🌹शुभ संध्या वंदन भैया जी 🙏🙏