
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
126 days ago
*"जब प्यारे जू ने की प्यारी जू के श्रीचरणों में मिहावर (आलता) लगाने की सेवा"* एक दिन प्यारे जू श्री ललिता जी से विनम्र होकर बोले- हे प्यारी ललिते जू ! मेरी एक विनती है, कृपया आज मुझे प्यारी जू के श्रीचरणों में मिहावर लगाने की सेवा की अनुमति प्रदान कीजिये। प्रियतम की बात श्रवण कर ललिता जी बोली– प्यारे जू ! क्या आप मिहावर लगा पाऐंगे ? तो प्रियतम ने कहा– मुझे अवसर तो दीजिए, मैं रंगदेवी जू से भी सुंदर और उत्तम कौशल से मिहावर लगा दूंगा। श्री ललिता जी ने उनका अनुरोध स्वीकार कर लिया, और सखी रंगदेवी जी से कहा हे सखी ! आज प्यारी जू की श्रीचरणो में मिहावर लगाने की सेवा हमारे प्राण प्रियतम प्यारे जू करेंगे। कृपया इन्हें अवसर दें। प्यारी जू के अभिषेक के पश्चात् सुदेवी जी ने कलात्मक ढंग से प्यारी श जू की वेणी गूँथ दी। फूलों का श्रृंगार भी कर दिया। सखी विशाखा जी ने प्यारी जू के श्रीमुखमंडल पर कुमकुम चंदन आदि से सुंदर पत्रावली की रचना कर दी। अब प्यारी जू के श्रीचरणों में मिहावर लगाना था। प्यारे जू पास में ही बड़ी व्याकुलता से मिहावर का पात्र लेकर खड़े थे। और प्यारी जू को विनती करने वाले मुखमंडल से निहारकर हाथ जोड़कर

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