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11.1.2026 *"चाहे कोई संसारी व्यक्ति हो, और चाहे वैरागी संन्यासी हो। समस्याएं तो सभी के जीवन में आती हैं।"* *"यदि कोई वैरागी संन्यासी व्यक्ति आपको प्रसन्न दिखाई देता है, तो इसका अर्थ यह न समझें, कि उसके जीवन में समस्याएं नहीं आती। उसके जीवन में भी अपनी अलग ढंग की समस्याएं आती हैं।"* फिर वह प्रसन्न क्यों दिखाई देता है? *"इसलिए कि उसके पास वैदिक सत्य शास्त्रों का ज्ञान है, वैराग्य है। उसकी सहायता से वह समस्याओं को सुलझाना जानता है। वह अपनी इस कला से समस्याओं को सुलझा लेता है। सदा प्रसन्न चित्त रहता और प्रसन्न मुख वाला दिखाई देता है।"* *"यदि आपकी भी कोई समस्याएं हों, तो आप भी ऐसे वैदिक विद्वान वैरागी संन्यासी लोगों के सत्संग से अपनी समस्याओं को सुलझाने की कला सीखें। उससे आप भी सुखी हो जाएंगे।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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