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🔱 बहुत कम लोग जानते हैं कि नटराज के चरणों के नीचे दबा हुआ यह छोटा-सा प्राणी कोई साधारण राक्षस नहीं, बल्कि **अपस्मार** है। शैव परंपरा में अपस्मार को **अज्ञान (अविद्या), अहंकार और आध्यात्मिक विस्मृति** का प्रतीक माना गया है। जब मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को भूलकर केवल अहंकार और मोह में जीने लगता है, तभी अपस्मार उसके भीतर जन्म लेता है। इसीलिए भगवान शिव जब **नटराज** रूप में आनंद तांडव करते हैं, तो वे अपस्मार को अपने चरणों तले दबाए रखते हैं। ध्यान देने योग्य बात यह है कि शिव उसे नष्ट नहीं करते, बल्कि नियंत्रित रखते हैं। इसका गहरा संदेश है— 🌿 अज्ञान पर विजय प्राप्त करनी होती है। 🌿 अहंकार को दबाकर रखना होता है। 🌿 ज्ञान तभी स्थिर रहता है, जब मन विनम्र बना रहे। इसी कारण नटराज की प्रतिमा केवल तांडव का चित्रण नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन का संदेश देती है— **जब तक अहंकार चरणों तले नहीं आता, तब तक आत्मज्ञान का द्वार नहीं खुलता।** 🔱 अपस्मार — जिसे महादेव ने अपने चरणों तले रखा। ॥ हर हर महादेव ॥ ❤️🙏

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