
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
178 days ago
जगन्नाथ पुरी की यह परंपरा वास्तव में बहुत ही अनूठी और भावुक है। यह भक्तों और भगवान के बीच के उस सहज और पारिवारिक रिश्ते को दर्शाती है, जहाँ औपचारिकता से ज्यादा अपनापन होता है। इस विश्वास के पीछे कई सुंदर पहलू हैं: भाई का प्रेम और जिम्मेदारी पुरी के मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भाई बलराम (बलभद्र) और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं। भारतीय परंपरा में बड़े भाई का स्थान पिता के समान माना जाता है। भक्तों का ऐसा मानना है कि अगर छोटे भाई (जगन्नाथ जी) ने लाड-प्यार या अपनी लीला में कोई बात अनसुनी कर दी है, तो बड़े भाई बलराम जी से 'शिकायत' करने पर वे तुरंत हस्तक्षेप करते हैं। अनुशासन और न्याय के प्रतीक बलराम जी को शेषनाग का अवतार और शक्ति व अनुशासन का प्रतीक माना जाता है। भक्त उन्हें एक 'बड़े बुजुर्ग' की तरह देखते हैं जो घर की व्यवस्था संभालते हैं। इसीलिए यह मान्यता है कि उनकी कचहरी में शिकायत ले जाने पर काम में देरी नहीं होती। भक्तों का 'अधिकार' यह परंपरा दिखाती है कि पुरी में भगवान केवल पूजनीय देव नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य हैं। यहाँ भक्त भगवान पर अपना पूरा अधिकार समझते हैं: * वे उनसे प्रेम करते हैं। * उनसे मांगते हैं। * और काम न होने पर नाराजगी भी जाहिर करते हैं।
Comments (4)

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Mar 6, 2026
जय जगन्नथ जी 🙏💫

Rama Devi Sahu
Mar 6, 2026
🙏‼️ Jai Jagannath Swami Nayan Path Gami Bhava Tume ‼️🙏

Rama Devi Sahu
Mar 6, 2026
नीलाचल निवासाय नित्याय परमात्मने। बलभद्र सुभद्राभ्यां जगन्नाथाय ते नमः॥ हिंदी अर्थ: जो भगवान नीलाचल (पुरी) में निवास करते हैं, जो शाश्वत हैं, परमात्मा हैं और जो अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं, उन जगन्नाथ को मैं सादर प्रणाम करता हूँ।
