
Rama Devi Sahu
106 days ago
हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत को सबसे महत्वपूर्ण और बड़ा व्रत माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं और बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं। ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को वट सावित्री व्रत रखा जाता है। इस बार 16 मई को व्रत सावित्री व्रत रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता सावित्री के तप और दृढ़ संकल्प से प्रसन्न होकर यमराज से सत्यवान के प्राण वापस किए थे। तभी से इस व्रत को अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। #वट_सावित्री_व्रत_तिथि: पंचांग के अनुसार, वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। इस बार अमावस्या तिथि 16 मई 2026, शनिवार के दिन सुबह 05 बजकर 12 मिनट पर शुरू हो जाएगी। जबकि, अमावस्या तिथि का समापन 16 मई की देर रात 01 बजकर 31 मिनट पर होगा। #वट_सावित्री_व्रत_का_शुभ_मुहूर्त: वट सावित्री व्रत के दिन सुबह स्नान के बाद वट वृक्ष की पूजा करना शुभ माना जाता है। पं राकेश झा के अनुसार पूजा के लिए सुबह का समय विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। ऐसे में वट सावित्री व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह 10 बजकर 26 मिनट तक सौभाग्य योग में पूजा कर सकती हैं। #वट_सावित्री_व्रत_का_विशेष_संयोग: वट सावित्री के दिन शोभन योग, शनिश्चरी अमावस्या, शनि जयंती और गजलक्ष्मी योग बन रहा है। इसके अलावा वृषभ राशि में बुधादित्य राजयोग, विपरीत राजयोग और मासिक कार्तिगाई जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं। ऐसे में पूजा करने से यह योग के प्रभाव जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लेकर आ सकते हैं। #वट_सावित्री_व्रत_की_पूजा_विधि: वट सावित्री व्रत के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ या नए वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करके भगवान विष्णु, माता सावित्री और सत्यवान की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। व्रत का संकल्प लेकर निर्जला या फलाहार व्रत रखें। फिर बरगद के पेड़ के पास जाकर जल, रोली, अक्षत, फूल, भीगा हुआ चना, मिठाई और सूत अर्पित करें। पेड़ की जड़ में जल चढ़ाकर दीपक जलाएं और सावित्री-सत्यवान की कथा का पाठ या श्रवण करें। इसके बाद वट वृक्ष की सात बार परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत लपेटें और पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि तथा अखंड सौभाग्य की कामना करें। अंत में भगवान से प्रार्थना करके आरती करें और जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा देने के बाद व्रत का पारण करें। #वट_सावित्री_व्रत_की_पूजा_सामग्री: वट सावित्री व्रत की पूजा सामग्री में सबसे पहले वट वृक्ष (बरगद) की पूजा के लिए कच्चा सूत या मौली, जल से भरा लोटा, गंगाजल, रोली, हल्दी, कुमकुम, अक्षत (चावल), फूल, माला, दूर्वा और पान के पत्ते शामिल किए जाते हैं। इसके अलावा पूजा में धूप, दीपक, रुई, घी या तेल, अगरबत्ती, नारियल, सुपारी, लौंग, इलायची, कपूर, फल, मिठाई, भीगे हुए चने, बताशे और पंचामृत भी रखा जाता है। सुहाग की सामग्री जैसे चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, चुनरी और कंघी का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा के दौरान सावित्री-सत्यवान की कथा सुनने के लिए पूजा की किताब या कथा पत्र भी साथ रखें। #वट_सावित्री_व्रत_का_महत्व: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास माना जाता है। इसे अक्षय वट के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और माता सावित्री और सत्यवान की कथा सुनती हैं। वट सावित्री व्रत के दिन जरूरतमंदों लोगों को कपड़े, भोजन और अन्य जरूरी वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ फल देने वाला माना जाता है।
Comments (7)

Saumya Sharma
May 16, 2026
बहुत ही सुन्दर पोस्ट के साथ अति उत्तम लेख के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद मेरी प्यारी दीदी 🙏🌹☺️ आप सदैव स्वस्थ और खुशहाल रहें 🙏 यही प्रार्थना है 🙏🌹☺️

Saumya Sharma
May 16, 2026
शनिवारी अमावस्या की आपको हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी 🙏🌹☺️

Saumya Sharma
May 16, 2026
आपको वट सावित्री व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏 त्रिदेव की कृपा से आपकी जोड़ी सदैव हँसते मुस्कुराते बनी रहे 🙏 इसी शुभकामना के साथ शुभ संध्या वंदन मेरी प्यारी दीदी 🙏🌹☺️

Saumya Sharma
May 16, 2026
जय श्री राधे कृष्ण दीदी 🙏🌹🙏

सविता
May 16, 2026
Radhe radhe 🙏🌹

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
May 16, 2026
राधे राधे।। आज का भगवद चिन्तन १६ मई २०२६ ____________*शुभ और श्रेष्ठ विचार* 🕉️शुभ एवं श्रेष्ठ कार्य केवल विचारों तक ही सिमट कर नहीं रह जाने चाहिए अपितु कार्य रूप में भी परिणित होने चाहिए। अच्छे कार्य करने से ही व्यक्ति महान बनता है। विचारात्मक प्रवृत्ति रचनात्मक जरूर होनी चाहिए। 🕉️जिस दिन शुभ विचार सृजन का रूप ले लेता है उस दिन परमात्मा भी प्रसन्न होकर आपके ऊपर आशीष की वर्षा कर देता है। कुछ ऐसा करो कि समाज की उन्नति हो। समाज स्वस्थ, सदाचारी बनकर उन्नति के मार्ग पर चले जिससे सबका भला हो। वेद यही तो कहते हैं जब हर प्रकार से आप अपना कल्याण कर लें तब धन के, भोग के पीछे मत भागना। 🕉️मैंने दुनिया से बहुत लिया अब देने की बारी है। अब लेने के लिए नहीं, देने के लिए जीना है। मत भूलो कि ये जीवन अस्थायी है। इसलिए जीवन के प्रत्येक क्षण का सम्मान करो। मृत्यु आ जाएगी तो कुछ भी न रहेगा। न यह शरीर, न इच्छाएं, ना कल्पनाएँ और नाहीं धन। हर चीज तुम्हारे साथ यही समाप्त हो जाएगी।अगर यहाँ कुछ रहेगा तो वो रहेगा आपके श्रेष्ठ कर्म। जय श्री कृष्ण🙏

