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मंडी की होली अपनी अनूठी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इसे 'मंडी शिवरात्रि' के साथ जोड़कर देखा जाता है, जो इस उत्सव को बाकी जगहों से काफी अलग और खास बनाता है। यहाँ मंडी की होली की कुछ प्रमुख विशेषताएं हैं: 1. अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेला और होली मंडी में होली का उत्सव अक्सर अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेले के समापन के आसपास आता है। इस दौरान पूरा शहर देवी-देवताओं के आगमन से भक्तिमय रहता है। जहाँ एक तरफ रंगों की मस्ती होती है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय देवताओं (कामरूनाग, माधोराय आदि) की मौजूदगी इसे आध्यात्मिक रूप देती है। 2. पड्डल मैदान की रौनक मंडी के प्रसिद्ध पड्डल मैदान में होली के दिन भारी जनसैलाब उमड़ता है। यहाँ स्थानीय लोग और पर्यटक मिलकर गुलाल उड़ाते हैं। इस मैदान में होने वाली होली की ऊर्जा देखने लायक होती है। 3. 'सेरी मंच' का उत्साह शहर के बीचों-बीच स्थित सेरी मंच होली का मुख्य केंद्र होता है। यहाँ बड़े-बड़े म्यूजिक सिस्टम लगाए जाते हैं और लोग पहाड़ी और बॉलीवुड गीतों पर थिरकते हुए एक-दूसरे को रंग लगाते हैं। 4. पारंपरिक वाद्ययंत्र मंडी की होली में आधुनिक संगीत के साथ-साथ ढोल, नगाड़े और शहनाई जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज भी सुनाई देती है। यह संगीत उत्सव के माहौल को और भी पारंपरिक बना देता है। 5. सामाजिक सौहार्द मंडी की होली की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ का भाईचारा है। पुराने मंडी की तंग गलियों से लेकर नए शहर तक, हर कोई जाति-पाति भूलकर एक-दूसरे को 'होली मुबारक' कहता है।

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