
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
130 days ago
## **सत्ययुग का महाप्रलय और माँ बगलामुखी का प्राकट्य** सत्ययुग की एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब संपूर्ण ब्रह्मांड विनाश के कगार पर था, तब **शक्ति की आठवीं महाविद्या, माँ बगलामुखी** का प्राकट्य हुआ। यह प्रसंग न केवल उनकी असीम शक्ति को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि वे क्यों 'ब्रह्मास्त्र विद्या' कहलाती हैं। ### **विनाशकारी तूफान और सृष्टि का संकट** कथा के अनुसार, सत्ययुग में एक समय ऐसा भीषण तूफान उठा कि संपूर्ण चराचर जगत नष्ट होने लगा। जल प्रलय और प्रचंड वेग ने देवताओं और मनुष्यों के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगा दिया। * **विष्णु जी की चिंता:** भगवान विष्णु, जो सृष्टि के पालनहार हैं, इस प्रलय को रोकने में स्वयं को असमर्थ पा रहे थे। * **तपस्या का संकल्प:** सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु सौराष्ट्र (गुजरात) क्षेत्र में स्थित **हरिद्रा सरोवर** के तट पर बैठ गए और महाशक्ति की कठोर तपस्या करने लगे। ### **पीताम्बरा देवी का प्राकट्य** विष्णु जी की तपस्या से प्रसन्न होकर महाशक्ति एक अद्भुत स्वरूप में प्रकट हुईं। 1. **हरिद्रा सरोवर से उद्गम:** माँ का प्राकट्य पीले रंग के जल वाले हरिद्रा सरोवर से हुआ। 2. **चतुर्भुज रूप:** वे पीले वस्त्र धारण किए हुए थीं और उनके दिव्य तेज से पूरा ब्रह्मांड आलोकित हो उठा। 3. **स्तम्भन शक्ति:** माँ ने अपनी **'स्तम्भन' (Stambhanam)** शक्ति का प्रयोग किया और उस महाविनाशकारी प्रलय को एक क्षण में रोक दिया। उन्होंने वायु के वेग और जल के उफान को जड़ कर दिया, जिससे सृष्टि सुरक्षित हो गई। ### **माँ बगलामुखी की महिमा** माँ बगलामुखी को **'पीताम्बरा'** भी कहा जाता है क्योंकि उन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है। उनकी शक्ति के कुछ मुख्य पहलू इस प्रकार हैं: | विशेषता | विवरण | |---|---| | **नाम का अर्थ** | 'बगला' शब्द संस्कृत के 'वल्गा' (दुल्हन या लगाम) से निकला है, जो नियंत्रण का प्रतीक है। | | **अधिष्ठात्री देवी** | वे वाणी, गति और शत्रुओं के षड्यंत्रों को रोकने वाली देवी हैं। | | **ब्रह्मास्त्र रूप** | उन्हें 'ब्रह्मास्त्र विद्या' कहा जाता है, जिसका वार कभी खाली नहीं जाता। | | **प्रतीक** | पीला रंग, हल्दी, और पीले पुष्प उनकी पूजा में अनिवार्य माने जाते हैं। | > **"ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ओम् स्वाहा।"** > आज भी भक्त अपनी रक्षा, शत्रुओं पर विजय और जीवन की बाधाओं को 'स्तम्भित' करने के लिए माँ की शरण में जाते हैं। सत्ययुग की वह घटना हमें याद दिलाती है कि जब अधर्म या विनाश का वेग चरम पर होता है, तब माँ बगलामुखी का सौम्य किंतु अजेय रूप ही ब्रह्मांड में संतुलन स्थापित करता है। **जय माँ पीताम्बरा!** 🙏✨
Comments (1)

Riya Riya 💖💖
Apr 23, 2026
🌹🌹Shubh prabhat vandan bhaiya 🌹🌹 Radhe Radhe ji 🌹🌹
