
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
192 days ago
20.2.2026 यदि आप किसी कारण से भयभीत हों, और शांति प्राप्त करना चाहते हों, तो आपको दो चीजों की आवश्यकता पड़ेगी। *"एक तो पूर्ण पुरुषार्थ और दूसरी प्रार्थना।"* जो व्यक्ति अपने कार्य की सिद्धि के लिए पूर्ण पुरुषार्थ करता है, तो प्रायः उसका कार्य सिद्ध हो जाता है। *"यदि कभी कोई कमी रह भी जाती है, और उसे यह भय सताने लगता है कि मेरा यह कार्य पूरा होगा या नहीं?"* तब वह पहले पूर्ण पुरुषार्थ करता है और जब उसके कार्य पूरा होने में कुछ कमी रह जाती है, तब वह उस कार्य की सिद्धि के लिए ईश्वर से और समाज के समर्थ एवं बुद्धिमान लोगों से प्रार्थना करता है। *"तब ईश्वर तथा समाज के समर्थ एवं बुद्धिमान लोग उसके पुरुषार्थ को देखते हैं, कि "यह व्यक्ति पूरा पुरुषार्थ कर रहा है, फिर भी इसका कार्य सिद्ध नहीं हो पा रहा, तो इसकी सहायता करनी चाहिए।"* *"तब ईश्वर और समाज के बुद्धिमान एवं समर्थ लोग उसकी सहायता कर देते हैं, और उसका कार्य सिद्ध हो जाता है। तब उसका भय दूर हो जाता है, और उसे शांति मिलती है।"* ईश्वर तथा समाज के बुद्धिमान लोगों का नियम याद रहे, कि *"ईश्वर और समाज के समर्थ एवं बुद्धिमान लोग आलसी या निष्क्रिय लोगों की सहायता नहीं करते, पुरुषार्थी व्यक्ति की ही सहायता करते हैं।"* *"आपका भी यदि कोई काम अटका हुआ हो, तो आप भी उस कार्य की सिद्धि के लिए पहले पूर्ण पुरुषार्थ करें। यदि वह कार्य पूरा न हो पाए, फिर ईश्वर तथा समाज के समर्थ एवं बुद्धिमान लोगों से प्रार्थना करें। तो आपका कार्य भी सिद्ध हो जाएगा। आपका भय दूर हो जाएगा तथा आपको भी शांति मिलेगी।"* नोट -- *"यह भी ध्यान रहे, कि आप जो कार्य करना चाहते हैं, उसको करने का शक्ति सामर्थ्य और साधन भी आपके पास उसी के अनुसार होने चाहिएं। यदि आपके पास साधन ₹10 के हैं, और आप कल्पना करें मैं ₹200 का काम कर लूं, तो आप का कार्य सिद्ध नहीं हो पाएगा। इसलिए ऐसी कल्पनाएं नहीं करनी चाहिएं, अन्यथा आप असफल होंगे।" "यदि ₹10 का काम करने की क्षमता हो, और आप 10 12 13 रुपए का काम करने की योजना बनाएं, तो आपका कार्य सिद्ध हो जाएगा।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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