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SHREE SHARMA

43 days ago

एकबार राधारानी ने जैसे ही मंजरी मुखसे ये सुना कि श्यामसुंदर संकेतकुंज में उनकी प्रतीक्षा कर रहे हैं ,तो अत्यंत अधीर हो राधारानी तत्काल कुंज की ओर चल पड़ी। अभिसार के लिए जाते समय राधारानी को कुछ भी ख्याल नही था,विभ्रम की स्थिति है..विभ्रम अनुभाव में नायिका प्रियतम से मिलने के आवेश में कपड़े गहने उलट पुलट पहनकर ही अभिसार के लिए चल पड़ती है,जैसे रास से पहले गोपियाँ चल पड़ी थीं,काजल होठों पर लगाकर,बाजूबंद पैरों में पहनकर... अत्यंत तीव्र गति से राधारानी आगे बढ़ रही है। मंजरी पीछे छूट रही है...राधारानी की तुलना श्रीपाद ने तीव्रगामी गंगा जी से की है,जो कांत-समुद्र के मिलन को द्रुत गति से आगे बढ़ रही है। मंजरी सोच रही है कि- "अंधेरी वर्षाकालीन रात्रि है। पंकिल भूमि पर चलना तो दूर,एक पैर रखना भी मुश्किल हो रहा है, स्वामिनी इतनी तेजी से जा रही है।" अचानक राधारानी की गति धीमी हुई ,उन्होंने नज़र पैरों पर डाली..चरण पंकिल भूमि में धंस रहे थे..कीचड़ उनके नूपुरों तक आ रहा था...अचानक नज़र पड़ी ...ये क्या..?? एक सर्प उनके नूपुरों से लिपटा हुआ था। अभिसार को निकली राधारानी को कौन सर्प रोक सकता था,वो वैसे ही कुंज की ओर चल पड़ीं...कुंज में पहुंची ही थी कि श्यामसुंदर ने अत्यंत प्रसन्नता के साथ आगे बढ़कर उनका आह्वान किया.... "राधे तुम आ गई,मुझे क्षमा करो ,मैंने स्वार्थवश इतनी रात्रि में तुम्हें बुलाया...तुम्हे कष्ट हुआ होगा।" श्यामसुंदर समझ गए कि प्रेम अधीर राधारानी तीव्र गति से आई है...श्यामसुंदर ने उनके कंधे के उपरसे देखा..मंजरी पीछे छूट गई है...तभी श्यामसुंदर की नज़र राधारानी के नूपुरों पर पड़ी वो चौकें... "ये क्या राधे!!!..सर्प..? तुम्हें कुछ भी होश नहीं..." राधारानी मुस्कुराई- "मैं जानती हूं सर्प है,मैंने देखा था" श्यामसुंदर बोले- "फिर भी तुम इसे लेकर चली आई!!!..तुमने तो सपेरे से सर्प वशीकरण मंत्र सीखा है। तुमने इसे वहीं वनमे क्यों नहीं छोड़ दिया?" राधारानी ने पुनः मुस्कुराकर कहा- "आपको इसकी सेवा दिख नहीं रही..मुझे दिख रही है। आज अभिसार की उत्कंठा में मैने एक ही नूपुर को कपड़े से बांधा था,ताकि वो न बजे,दूसरा बांधना भूल गई थी। आप ही तो कहते यह कि राधे तुम्हारे नूपुरों की झंकार से दिशाएं डोल जाती हैं...दास की भांति ये सर्प मेरे नूपुरों से लिपटा रहा ताकि वो बज न पाए,किसी को मेरे अभिसार का भेद न खोल दे..और दास को छोड़ आऊं..? ये मुझसे कभी नहीं होगा।" श्यामसुंदर निर्वाक होकर बड़ी बड़ी आंखे कर आश्चर्य से राधारानी की बातें सुन रहे...मंजरी सुनकर पल पल बलिहारी जा रही थी। वास्तव में कोई छोटी सी सेवा, हो सकता है, श्यामसुंदर के नज़रों से चूक जाए...पर भाव प्रेम से की गई छोटी से छोटी सेवा भी राधारानी की नज़रों से नहीं चूक सकती। भाव और प्रेम तो वो स्वयम है

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Comments (3)

My Mandir  good by

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Jul 19, 2026

jai Shri radhe radhe 🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Jul 18, 2026

*🦚राधे राधे जय श्री कृष्ण🦚* आप और आप के समस्त परिवार की रात्रि सुखद एवं शुभ मंगलकारी हो। आने वाली नई सुबह आप और आप के समस्त परिवार के लिए असीमित खुशियां लेकर आए *शुभ रात्रि वंदन 🪔🪔*