
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
209 days ago
3.2.2026 जब कोई व्यक्ति किसी को सुझाव देता है तो यह मान कर देता है, कि *"वह मुझसे कम बुद्धि वाला है, या इस विषय में मुझसे कम बुद्धि वाला है, जिस विषय में मैं उसे सुझाव देना चाहता हूं। मैं उससे अधिक बुद्धि वाला हूं। मुझे इसको यह सुझाव देकर उसे उस गलती से बचाना चाहिए, जो गलती यह व्यक्ति करने वाला है।"* सारी बात कहने का तात्पर्य यह हुआ, कि *"सुझाव देने वाला व्यक्ति, दूसरे व्यक्ति को अपने से कम बुद्धिमान मानता है, तथा स्वयं को उससे अधिक बुद्धिमान मानता है।" जबकि अनेक बार इससे उल्टा ही होता है। "बिना सोचे समझे, बिना पूरा विचार किये ही, वह अपने से भी अधिक बुद्धिमान व्यक्ति को भी, अपनी मूर्खता के कारण सुझाव देने लगता है।"* ऐसी गलती करने से बचना चाहिए। पहले तो दूसरे की स्थिति को ठीक से समझना चाहिए, कि *"वह जो कर रहा है, वह ठीक काम कर रहा है या कुछ गलती कर रहा है? बिना सोचे समझे, बिना परीक्षा किए यूं ही किसी को सुझाव देना ही, अपने आप में मूर्खता है, बुद्धिमत्ता नहीं।"* और यदि कहीं आपको पता चल भी जाए कि *"सामने वाला व्यक्ति कुछ गलती कर रहा है, और यदि आप उसे कोई सुझाव देना भी चाहते हों, तो सभ्यता की दृष्टि से पहले उससे पूछना चाहिए, कि "मैं आपको इस विषय में एक सुझाव देना चाहता हूं। क्या आप मेरा सुझाव सुनना चाहते हैं? यदि वह कहे, हां। मैं आपका सुझाव सुनना चाहता हूं। तब तो उसे अपना सुझाव सुनाएं।"* यदि वह मना कर दे, कि *"मुझे इस विषय में आपका सुझाव नहीं चाहिए।"* तो उसे सुझाव नहीं देना चाहिए। जब व्यक्ति बिना स्थिति को समझे, बिना दूसरे व्यक्ति से स्वीकृति लिए अथवा स्थिति को समझ कर भी, दूसरे व्यक्ति से बिना पूछे, यूं ही सुझाव देने लगता है, तो इससे यह सिद्ध होता है कि *"वह स्वयं को अधिक बुद्धिमान और दूसरे को मूर्ख समझता है।"* ऐसा करने का अर्थ है कि *"वह व्यक्ति दूसरे का अपमान कर रहा है। और किसी को किसी का अपमान करने का अधिकार नहीं है। इसलिए बिना पूछे या बिना स्वीकृति लिए किसी को सुझाव न दें, और ऐसा अपराध करने से बचें।"* यह बात अध्यापकों वेद प्रचारकों और वैदिक उपदेशकों पर लागू नहीं होती। क्योंकि उनको तो समाज ने पहले से ही यह अधिकार दे रखा है कि *"आप हमें अच्छे-अच्छे उपदेश देवें और अच्छे-अच्छे सुझाव देवें, जिससे कि हम अपनी उन्नति और अपने जीवन में सुख को प्राप्त कर सकें।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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