MyMandirInstall

बरसाना में एक बार श्री लाड़ली सरकार जू अपनी सखियों के साथ कुंज में बैठी थीं। 🌸 चारों ओर फूलों की सुगंध थी, मंद-मंद पवन चल रही थी और सखियाँ मधुर स्वर में “राधे राधे” गा रही थीं। ❤️ उधर नंदलाल श्री कृष्ण जी को जब पता चला कि आज श्रीजी बहुत प्रसन्न हैं, तो उन्होंने सोचा — “आज कुछ नई लीला करनी चाहिए…” 😊 श्याम सुंदर ने एक माली का वेश धारण किया। सिर पर पगड़ी, हाथ में फूलों की टोकरी और चेहरे पर हल्की मुस्कान लेकर वे बरसाना पहुँच गए। 🌺 उन्होंने श्री लाड़ली जू के सामने जाकर कहा — “श्रीमती जी! आपके लिए वृंदावन से सबसे सुंदर फूल लाया हूँ।” सखियाँ तुरंत समझ गईं कि यह कोई साधारण माली नहीं… पर लीला देखने के लिए सब चुप रहीं। श्रीजी ने मुस्कुराकर पूछा — “अच्छा माली जी, इन फूलों की कीमत क्या लोगे?” कान्हा बोले — “बस एक मुस्कान…” 🌿 यह सुनकर सखियाँ हँसने लगीं। श्री लाड़ली जू ने लज्जा से अपना मुख झुका लिया। 🌸 तभी एक सखी बोली — “अरे! ये कोई माली नहीं, ये तो हमारे श्यामसुंदर हैं!” श्री कृष्ण जी हँस पड़े और बोले — “राधे! पूरे ब्रज में सबसे सुंदर पुष्प तो आपका प्रेम है। मैं तो उसी प्रेम का भिखारी बनकर आता हूँ…” ❤️🙏 यह सुनते ही श्री लाड़ली जू की आँखें प्रेमाश्रुओं से भर गईं। कुंज में “राधे-श्याम” के जयकारे गूंज उठे। 🌺✨ तभी से भक्त कहते हैं — “भगवान श्री कृष्ण को वैभव नहीं, सिर्फ़ श्री राधा जैसा निष्कलंक प्रेम प्रिय है।” 💖 जय जय श्री राधे 🙏 जय श्री बिहारी लाल जी 🌿

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!