
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
160 days ago
24.3.2026 'आवश्यक' और 'आवश्यकता', देखने में तो ये दोनों शब्द एक जैसे लगते हैं। परंतु उनके अर्थ में बहुत अंतर है। जैसे मोहन को रामकुमार की आवश्यकता पड़ गई। क्योंकि एकाध अवसर पर मोहन को रामकुमार से अपना कुछ काम कराना था। *"रामकुमार, मोहन का कोई गहरा मित्र नहीं था। उसके साथ बार-बार उठना बैठना नहीं था। ऐसी स्थिति में जब मोहन को रामकुमार से कोई काम लेना हो, तो इसे 'आवश्यकता' कहते हैं अर्थात मोहन को रामकुमार की एक अवसर पर कुछ काम कराने की आवश्यकता पड़ गई। फिर उसने रामकुमार से अपना वह काम करा लिया, और बात ख़त्म।"* दूसरी ओर -- *"सोहन, मोहन का एक मित्र है। इन दोनों का लगभग प्रतिदिन मिलना होता है। साथ में उठना बैठना होता है। एक दूसरे के घर आना जाना होता है। मिल बैठकर खाना पीना होता है। दोनों के विचार बहुत मिलते हैं, और दोनों प्रेम से एक दूसरे की सहायता करते हैं। इस स्थिति में सोहन, मोहन के सुख के लिए 'आवश्यक' है।"* तो कहने का तात्पर्य यह है कि *"जिसके बिना आपका काम नहीं चलता, जिसके साथ आपके जीवन का सुख-दुख जुड़ा हुआ है, उसे 'आवश्यक' कहते हैं।"* अब आप दोनों का अंतर समझ गए होंगे। इतना समझ कर, इतना और समझना है, कि *"जैसे रामकुमार, मोहन की आवश्यकता है, परन्तु वह उसके जीवन के लिए आवश्यक नहीं है। इसी प्रकार से आप भी कभी-कभी दूसरों के लिए आवश्यकता होते हैं, आवश्यक नहीं। तो इस बात को पहचान कर अपना जीवन जिएं, कि आप किसके लिए आवश्यकता हैं, और किसके लिए आवश्यक।"* *"जिसके लिए आप आवश्यकता हैं, यदि आप उसे कम महत्व देवें। और जिसके लिए आप आवश्यक हैं, उसको अधिक महत्व देवें, तो आप सुख पूर्वक अपना जीवन जी सकेंगे। और वह व्यक्ति भी सुख पूर्वक अपना जीवन जी सकेगा, जिसके लिए आप आवश्यक हैं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़ गुजरात।"*

Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
