
SHREE SHARMA
237 days ago
॥ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॥ #श्रोता‒#भगवान् सभीके हृदयमें #विराजमान हैं, फिर भी मनुष्यके द्वारा #गलत काम क्यों होता है ? #स्वामीजी‒क्या आपने भगवान्से #प्रार्थना की है कि महाराज, मेरे द्वारा गलत काम न हो ? भगवान्का जबर्दस्ती करनेका #स्वभाव बिल्कुल नहीं है । अच्छे #सन्त-#महात्मा भी बात कह देते हैं, पर #जबर्दस्ती नहीं करते । हरेकको बात कहनेमें भी वे #संकोच करते हैं । विशेष कृपा होती है, तब कहते हैं । भगवान्ने अठारह अक्षौहिणी सेनामें केवल अर्जुनको ही उपदेश दिया, दूसरोंको क्यों नहीं दिया ? चोर-डाकू जबर्दस्ती करते हैं । आपके घर #साधु आयेगा तो #भिक्षा के लिये आवाज दे देगा, आप नहीं बोलो तो चल देगा । परन्तु #डाकू को नहीं बोलो तो क्या वह चल देगा ? भगवान् सम्पूर्ण प्राणियोंके हृदयमें रहते हैं । उनके बिना कोई प्राणी-पदार्थ है ही नहीं । वे स्वतः-स्वाभाविक सबमें परिपूर्ण हैं । पर वे विधि-निषेध करनेके लिये सबमें परिपूर्ण नहीं हैं । जैसे #गाय के भीतर रहनेवाला घी गायके काम नहीं आता, ऐसे ही भगवान् सबमें व्यापक रहते हुए भी काम नहीं आते । प्रार्थना करनेपर वे काम आते हैं । अगर भगवान् विधि-निषेध करें तो सब शास्त्र निरर्थक हो जायँगे, गुरु निरर्थक हो जायगा, शिक्षा निरर्थक हो जायगी ! श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज


