
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
172 days ago
11.3.2026 बहुत से लोग बड़ी अच्छी-अच्छी बातें कहते हैं। सुनने में उनके विचार बहुत अच्छे लगते हैं, होते भी हैं। परंतु जितनी बातें वे कहते हैं, उनमें से आचरण बहुत कम बातों पर करते हैं। धीरे-धीरे लोग उनके व्यवहार को समझ जाते हैं, कि *"यह व्यक्ति केवल बातें ही बड़ी-बड़ी करता है, आचरण में कुछ नहीं है।"* तो ऐसे विचार बहुत अधिक सार्थक नहीं होते। *"विशेष सार्थकता तो तभी है, जब व्यक्ति उन उत्तम विचारों पर आचरण भी करे।"* जब वह दूसरों को अच्छी-अच्छी बातें कहता है, तो पहले पहले लोग उससे कुछ प्रभावित भी होते हैं। क्योंकि उसके विचार तो वास्तव में अच्छे ही होते हैं। *"परंतु धीरे-धीरे जब लोग गहराई से देखते हैं, कि इसके जीवन में आचरण तो उत्तम है नहीं। तब उसके विचारों का वह प्रभाव भी धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है, और लोग उससे दूर हो जाते हैं।"* यदि आप चाहते हों, कि *"लोग आपके उत्तम विचारों को सुनें, आपके साथ लंबे समय तक जुड़े रहें, आपकी बातों पर ध्यान दें, उन बातों पर आचरण भी करें, आपको अच्छा व्यक्ति मानें, तो आप अपने विचारों को केवल प्रवचन अथवा लेखन तक सीमित न रखें, बल्कि पूरी शक्ति लगाकर अपने उन विचारों पर आचरण भी करें। तभी आपके वे विचार सार्थक हो सकते हैं, अन्यथा नहीं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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