
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
2 days ago
25.10.2026 *"बहुत से लोग दूसरों को प्रसन्न करने में लगे रहते हैं, और इस प्रयास में वे अपना ध्यान रखना भी भूल जाते हैं।"* *"उदाहरण के लिए कुछ पत्नियां अपने पति का बहुत ध्यान रखती हैं। अपने बच्चों और परिवार के लोगों का भी ध्यान रखती हैं। उन सबको प्रसन्न रखती हैं। परंतु सेवा की भावुकता के कारण खाने-पीने, विश्राम करने आदि आदि में स्वयं अपना पूरा ध्यान नहीं रखती। यह ठीक नहीं है।"* मेरा आप सबसे निवेदन है, कि *"आप अपने पति का, बच्चों का, परिवार के अन्य लोगों का भले ही ध्यान रखें। उनको खिलाएं पिलाएं सेवा करें। यह बहुत अच्छी बात है। इसका आपको पुण्य मिलेगा।"* *"परंतु इस प्रयास में अपना ध्यान रखना न भूलें।" "अपने स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखें। यदि आप स्वयं ही रोगी हो गए, तो परिवार वालों का क्या ध्यान रख पाएंगे? तब उल्टे आपको उनकी सेवा लेनी पड़ जाएगी।" "तो ऐसा दिन न आए, कि आप को दूसरों से सेवा लेनी पड़े।"* *"इसलिए आप पहले ही सावधान रहें। परिवार की सेवा करने के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य विश्राम आदि का भी पूरा ध्यान रखें तभी आप अपने परिवार को और स्वयं को सुखी बना पाएंगे।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़ गुजरात।"*

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