
SHREE SHARMA
6 days ago
स्वधा देवी स्तोत्रम् 💝💝💝💝💝 ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खण्ड, अध्याय 41 - ब्रह्मा कृत 🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊 भूमिका💐 श्राद्ध में हम स्वधा बोलकर पितरों को आहुति देते हैं, देवताओं को स्वाहा बोलकर। प्रश्न उठा - ये स्वधा कौन हैं? ब्रह्मवैवर्त पुराण कहता है कि स्वधा कोई शब्द नहीं, देवी हैं - गोलोक में राधा की सखी, श्रीकृष्ण के वक्षःस्थल पर धारण की हुई गोपी, जो राधा के शाप से पृथ्वी पर आईं और ब्रह्मा की मानसपुत्री बनीं। बिना स्वधा देवी की कृपा के पितरों तक कव्य नहीं पहुँचता। इसलिए श्राद्ध से पहले स्वधा की पूजा अनिवार्य है। यही स्तोत्र ब्रह्मा ने उनकी उत्पत्ति के समय गाया था। मूल स्तोत्र - भावार्थ सहित💐 स्वधोच्चारणमात्रेण तीर्थस्नायी भवेन्नरः । मुच्यते सर्वपापेभ्यो वाजपेयफलं लभेत् ॥ केवल स्वधा शब्द के उच्चारण मात्र से मनुष्य तीर्थों में स्नान किया हुआ हो जाता है, समस्त पापों से मुक्त होकर वाजपेय यज्ञ का फल पाता है। स्वधा स्वधा स्वधेत्येवं यदि वारत्रयं स्मरेत् । श्राद्धस्य फलमाप्नोति कालतर्पणयोस्तथा ॥२ जो स्वधा, स्वधा, स्वधा - इस प्रकार तीन बार स्मरण करे, उसे श्राद्ध, काल और तर्पण - तीनों का फल प्राप्त होता है। श्राद्धकाले स्वधास्तोत्रं यः शृणोति समाहितः । लभेच्छ्राद्धशतानाञ्च पुण्यमेव न संशयः ॥३ श्राद्ध के समय जो एकाग्र होकर इस स्वधा स्तोत्र को सुने, उसे निःसंदेह सौ श्राद्धों का पुण्य मिलता है। स्वधा स्वधा स्वधेत्येवं त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः । प्रियां विनीतां स लभेत् साध्वीं पुत्रं गुणान्वितम् ॥४ जो मनुष्य तीनों संध्याओं में स्वधा, स्वधा, स्वधा का पाठ करे, उसे विनम्र, साध्वी प्रिय पत्नी और गुणवान पुत्र प्राप्त होता है। पितॄणां प्राणतुल्या त्वं द्विजजीवनरूपिणी । श्राद्धाधिष्ठातृदेवी च श्राद्धादीनां फलप्रदा ॥५ हे देवि! तुम पितरों के लिए प्राणों के समान हो, ब्राह्मणों के लिए जीवन-स्वरूपा हो। तुम श्राद्ध की अधिष्ठात्री देवी हो और श्राद्ध आदि का फल देने वाली हो। बहिर्मन्मनसो गच्छ पितॄणां तुष्टिहेतवे । सम्प्रीतये द्विजातीनां गृहिणां वृद्धिहेतवे ॥६ पितरों की तुष्टि के लिए, ब्राह्मणों की प्रसन्नता के लिए और गृहस्थों की वृद्धि के लिए तुम मेरे मन से बाहर प्रकट होओ। नित्यानित्यस्वरूपासि गुणरूपासि सुव्रते । आविर्भावस्तिरोभावः सृष्टौ च प्रलये तव ॥७ हे सुव्रते! तुम नित्य भी हो और अनित्य भी, गुण-स्वरूपा हो। सृष्टि के समय तुम्हारा आविर्भाव और प्रलय में तिरोभाव होता है। ॐ स्वस्ति च नमः स्वाहा स्वधा त्वं दक्षिणा तथा । निरूपिताश्चतुर्वेदे षट्प्रशस्ताश्च कर्मिणाम् ॥८ तुम ही ॐ, स्वस्ति, नमः, स्वाहा, स्वधा और दक्षिणा हो। चारों वेदों में तुम्हारे इन छह रूपों का वर्णन है, जो कर्मकांडी जनों में प्रशस्त हैं। पुरासीत्त्वं स्वधागोपी गोलोके राधिकासखी । धृतोरसि स्वधात्मानं कृतं तेन स्वधा स्मृता ॥९ तुम पहले गोलोक में राधा की सखी स्वधा नाम की गोपी थीं। श्रीकृष्ण ने तुम्हें अपने वक्षःस्थल पर धारण किया था, इसलिए तुम स्वधा कही गईं। माहात्म्य💐 स्वधा देवी पितरों और मनुष्यों के बीच सेतु हैं। जैसे बिना डाकिए के चिट्ठी नहीं पहुँचती, वैसे बिना स्वधा के कव्य पितरों तक नहीं पहुँचता। जो श्राद्ध तो करता है पर स्वधा का स्मरण नहीं करता, उसका श्राद्ध निष्फल कहा गया है। फलश्रुति💐 ब्रह्मा कहते हैं - इस पावन स्तोत्र को जो समाहित चित्त से सुने, वह समस्त तीर्थों में स्नान का पुण्य और वेदपाठ का फल पाता है। त्रिसंध्या पाठ करने वाले को सुशील पत्नी और गुणवान पुत्र मिलता है। श्राद्धकाल में सुनने से सौ श्राद्धों का पुण्य निश्चित है। ॥ इति श्रीब्रह्मवैवर्ते प्रकृतिखण्डे ब्रह्मकृतं स्वधास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Sep 30, 2026
🙏🌙✨ शुभ रात्रि 🌙✨ श्री कृष्ण आपकी सभी चिंताएँ दूर करें, 🙏 राधा रानी आपके जीवन में सुख, शांति और प्रेम भर दें। 💖 Radhey Radhey 🙏 हे मेरे भक्त, रात सोने से पहले बस एक बार राधे-कृष्ण को याद कर ले ❤️ श्री कृष्ण तेरी सारी चिंता हर लेंगे और राधा रानी तेरे जीवन को सुख, शांति और प्रेम से भर देंगी 🙇🏻♂️ जहाँ राधा-कृष्ण का नाम है, वहाँ चिंता टिक ही नहीं पाती 💫 तू निश्चिंत हो कर सो जा, तेरी रात की पहरेदारी मेरे युगल सरकार करेंगे 🚩 रात राधामय हो तो सुबह कृष्णमय हो जाती है 💙💖 आपकी रात शुभ और मीठे सपनों भरी हो 🌸 शुभ रात्रि 🙏 राधे राधे 💖

Rahul Mishra
Sep 30, 2026
Jai shree radhe krishna ji 🙏🌹❤️
