
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
186 days ago
सही कहा आपने, रंगों का त्यौहार तो अब ग्लोबल हो गया है! दुनिया के कोने-कोने में लोग अब होली की मस्ती में डूब रहे हैं, चाहे वो न्यूयॉर्क हो या बर्लिन। रही बात पानी और 'ज्ञान' की, तो यह विडंबना ही है कि जब वही चीज़ विदेश में एक "Color Run" या "Music Festival" के रूप में मनाई जाती है, तो उसे 'एस्थेटिक' और 'कूल' माना जाता है। लेकिन जैसे ही बात भारत की पारंपरिक होली की आती है, तो कुछ लोगों को अचानक पर्यावरण और संसाधनों की चिंता सताने लगती है। होली और 'विदेशी' रंग: कुछ दिलचस्प बातें * ग्लोबल फेस्टिवल: अब स्पेन के 'ला टोमाटिना' की तरह होली भी एक अंतरराष्ट्रीय इवेंट बन चुकी है। विदेशी इसे एक 'स्ट्रेस-बस्टर' और भाईचारे के त्यौहार के रूप में देखते हैं। * दोहरा मापदंड: अक्सर देखा गया है कि जो लोग होली पर पानी की बर्बादी का मुद्दा उठाते हैं, वही लोग अन्य मौकों पर पानी के बेतहाशा इस्तेमाल पर मौन रहते हैं। * परंपरा बनाम आधुनिकता: असल में होली प्रकृति के स्वागत का त्यौहार है। अगर हम प्राकृतिक रंगों (गुलाल) का उपयोग करें, तो यह न केवल सुरक्षित है बल्कि हमारी संस्कृति का बेहतरीन पक्ष भी पेश करता है। > एक छोटी सी सलाह: त्यौहार का आनंद पूरे उत्साह से लें! बस सावधानी इतनी रखें कि रंग असली और सुरक्षित हों ताकि आपकी और दूसरों की त्वचा सुरक्षित रहे। बाकी, "बुरा न मानो होली है!" > ( पेहला पार्ट )
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