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SHREE SHARMA

437 days ago

भालाग्निकीलकलिताखिलरन्ध्रभागं भर्गस्य वो दिशतु शर्म शिर: कपालम्। यत्कालवह्निवपुष: पचत: प्रभुत- भूतव्रजं व्रजति तस्य महानसत्वम् ।। जो कपाल (खप्पर) प्रलयकालमें समग्र लोक समुदाय को पकाते हुए कालाग्निरुद्र रूपधारी भगवान शंकरका रसोई घर बन जाता है और जिसके समग्र छिद्रभाग उनकी ललाट की अग्नि की ज्वालाओं से पूर्ण है, - वह भगवान शंकर का कपाल आपलोगों को मोक्षलक्ष्मी प्रदान करे। 🌸🌸🌸🌸🌸 ॐ नम: शिवाय 🌸🌸🌸🌸🌸

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Comments (2)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Jun 19, 2025

Har Har Mahadev 🙏🌿🔱🌺🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️

Amit

Amit

Jun 19, 2025

Har Har Mahadev 🙏🙏