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जी हाँ, गणगौर का त्यौहार राजस्थान और उत्तर भारत के कई हिस्सों में बहुत ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व अटूट विश्वास और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इस त्यौहार की कुछ खास बातें: * नाम का अर्थ: 'गण' भगवान शिव का प्रतीक है और 'गौर' माता पार्वती (गौरी) का। * अवधि: यह चैत्र मास की प्रतिपदा से शुरू होकर तृतीया (तीज) तक, यानी पूरे 18 दिनों तक चलता है। * महत्व: विवाहित महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएँ अच्छे जीवनसाथी की कामना के लिए माँ गौरी की पूजा करती हैं। * परंपरा: होली की राख से पिंड बनाकर पूजा शुरू होती है। अंतिम दिन, यानी गणगौर तीज पर माता पार्वती की भव्य सवारी निकाली जाती है और मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है। यह त्यौहार न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारिवारिक मूल्यों को भी दर्शाता है।

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